दिल्ली पुलिस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कथित रूप से निशाना बनाने वाली सोशल मीडिया पोस्टों के संबंध में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि कुछ पोस्टों में आपत्तिजनक और मानहानिकारक सामग्री साझा की गई थी। मामले की जांच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट कर रही है।
जांच के तहत पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) को नोटिस जारी कर संबंधित पोस्टों को हटाने या भारत में उनकी पहुंच सीमित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संबंधित खातों की ग्राहक जानकारी, गतिविधि लॉग और अन्य तकनीकी विवरण भी मांगे गए हैं।
पुलिस का कहना है कि इन पोस्टों से प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा और सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया तथा इनके प्रसार से सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।
रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी कथित एआई-जनित और डीपफेक सामग्री साझा करने वाले लगभग 500 सोशल मीडिया खातों की पहचान की है। इन खातों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से संपर्क किया गया है।
वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों से सवाल पूछने और जवाबदेही मांगने का अधिकार है। पार्टी का कहना है कि सोशल मीडिया पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार का हिस्सा है और इसे अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।
यह घटनाक्रम NEET-UG 2026 प्रश्नपत्र लीक को लेकर जंतर-मंतर पर हुए लंबे विरोध प्रदर्शनों के बाद सामने आया है। इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई, सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री और उससे जुड़े खातों की जांच को लेकर बहस तेज हो गई है।

