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अब्दुल पीड़ित है, तो बुलडोज़र कहां है? CJP ने उठाए सवाल, प्रशासन को दी सख़्त चेतावनी

कोलकाता प्रेस क्लब में CJP की ओर से शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें अब्दुल हाफिज के पिता की कथित मारपीट और हत्या के मामले में न्याय की मांगों को लेकर प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए।

CJP ने कहा कि संगठन ने 10 दिन पहले सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी थीं और कार्रवाई के लिए 10 दिन का समय दिया था, लेकिन समयसीमा समाप्त होने के बावजूद कई महत्वपूर्ण मांगों पर ठोस प्रगति नहीं हुई है।

CJP के को-कन्वीनर आशुतोष रांका ने सरकार के सामने निष्पक्ष जांच सहित चार प्रमुख मांगें रखी थीं। इनमें सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन और अब्दुल हाफिज के पिता के नाम पर स्कूल की स्थापना प्रमुख मांगों में शामिल हैं। संगठन ने कहा कि इन मांगों पर अभी तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।

CJP के संयुक्त सचिव प्रकाश गोलू ने कई बार बांका के जिलाधिकारी (DM) से CJP प्रतिनिधिमंडल की पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव के साथ मुलाकात कराने का अनुरोध किया। हालांकि, यह बैठक अब तक नहीं हो सकी। CJP के मुताबिक, DM ने बताया कि मुख्य सचिव उस समय कोलकाता में मौजूद नहीं थे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान CJP ने केंद्रीय गृह मंत्री को लेकर भी सवाल उठाए। संगठन ने कहा कि जब केंद्रीय गृह मंत्री पश्चिम बंगाल के दौरे पर थे, तो क्या उनके लिए अब्दुल हाफिज से मुलाकात करना या कम से कम फोन पर बातचीत करना संभव नहीं था? CJP ने तंज कसते हुए कहा कि हो सकता है कि जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्री दिल्ली नगर निगम के लिए पर्चे बांटते हुए नजर आएं।

बांका DM के अनुरोध पर CJP ने प्रशासन को अपनी मांगों पर कार्रवाई करने के लिए कुछ अतिरिक्त समय देने का फैसला किया है। संगठन ने कहा कि उसका उद्देश्य टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि अब्दुल हाफिज और उनके परिवार को न्याय दिलाना है। CJP ने स्पष्ट किया कि वह अहिंसा और संविधान के रास्ते पर प्रतिबद्ध है और महात्मा गांधी तथा डॉ. बी.आर. आंबेडकर के सिद्धांतों को मानता है।

CJP ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी भी तरह की बुलडोज़र कार्रवाई का समर्थन नहीं करता। संगठन के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई या सजा केवल कानून और संविधान के दायरे में ही होनी चाहिए।

CJP ने कहा कि वह पूरे मामले की निगरानी जारी रखेगा और प्रशासन द्वारा दिए गए अतिरिक्त समय में मांगें पूरी नहीं होने पर आगे महत्वपूर्ण कदम उठाने के लिए मजबूर होगा।

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