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कश्मीरी पंडितों के साथ हुए अत्याचारों की जांच का स्वागत, जफरुल-इस्लाम खान ने LG सिन्हा से कश्मीरी नागरिकों के मानवाधिकार उल्लंघनों की भी जांच की मांग की

नई दिल्ली: दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष और ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत के अध्यक्ष डॉ. जफरुल-इस्लाम खान ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को पत्र लिखकर कश्मीरी नागरिकों के खिलाफ अतीत में सेना, सुरक्षा बलों, पुलिस और सरकार समर्थित आतंकवादियों द्वारा किए गए कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की व्यापक और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

डॉ. खान ने जम्मू-कश्मीर स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) द्वारा कश्मीरी पंडितों के खिलाफ अतीत में हुए अत्याचारों की जांच के फैसले का स्वागत करते हुए इसे “सही दिशा में उठाया गया कदम” बताया। हालांकि, उन्होंने कहा कि वास्तविक मेल-मिलाप तभी संभव है जब दशकों से चले आ रहे संघर्ष के दौरान प्रभावित सभी समुदायों के पीड़ितों के मामलों में समान जवाबदेही तय की जाए और उन्हें न्याय मिले।

अपने पत्र में डॉ. खान ने जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से अनसुलझे मानवाधिकार मामलों की ओर उपराज्यपाल का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने करीब 10,000 लापता युवाओं के मामलों की आधिकारिक जांच की मांग की और कहा कि उनके लापता होने के पीछे की सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए।

उन्होंने उन सैकड़ों महिलाओं के मामलों में भी स्पष्ट जवाब की मांग की जिन्हें ‘हाफ-विधवा’ के रूप में जाना जाता है और जिनके पति वर्षों से लापता हैं। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में मौजूद सैकड़ों अज्ञात और बिना निशान वाली कब्रों की पारदर्शी जांच कराने की मांग भी की गई।

डॉ. खान ने जम्मू-कश्मीर के इतिहास की कई गंभीर घटनाओं की निष्पक्ष जांच की जरूरत पर जोर दिया। इनमें 1991 का कुनन पोशपोरा सामूहिक बलात्कार मामला और 2000 का चट्टीसिंहपोरा सामूहिक हत्याकांड प्रमुख हैं।

उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित ऐसे मामलों की विश्वसनीय और निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि पीड़ितों और उनके परिवारों को न्याय मिल सके तथा सच्चाई आधिकारिक रूप से सामने आ सके।

डॉ. खान ने 2010 के आंदोलन के दौरान पेलेट गन से घायल और दृष्टि खोने वाले लोगों के लिए भी व्यापक सहायता की मांग की। उन्होंने पीड़ितों को उचित चिकित्सा सुविधा, निष्पक्ष मुआवजा और औपचारिक सरकारी माफी दिए जाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि वर्षों बाद भी पेलेट गन से प्रभावित लोगों की समस्याओं का समाधान जरूरी है और उनके पुनर्वास तथा सम्मानजनक जीवन के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।

डॉ. खान ने लंबे समय से जेलों में बंद राजनीतिक कैदियों के मुद्दे को भी अपने पत्र में उठाया। उन्होंने प्रशासन से मानवीय आधार पर उम्रदराज कैदियों को उनके परिवारों के साथ जीवन के शेष वर्ष बिताने की अनुमति देने की अपील की।

उन्होंने विशेष रूप से शबीर शाह और डॉ. कासिम फक़्तू जैसे उम्रदराज कैदियों का उल्लेख करते हुए कहा कि मानवीय आधार पर ऐसे बंदियों को अपने परिवारों के साथ रहने का अवसर मिलना चाहिए।

अपने पत्र के अंत में डॉ. जफरुल-इस्लाम खान ने उम्मीद जताई कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा इस अपील पर संवेदनशीलता से विचार करेंगे और मौजूदा जांच का दायरा व्यापक करते हुए जम्मू-कश्मीर में दशकों से संघर्ष से प्रभावित सभी समुदायों के पीड़ितों के लिए समान न्याय और लंबे समय से लंबित समाधान सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाएंगे।

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