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कच्छ में मुस्लिम युवक से कथित मारपीट के मामले में वन विभाग के 5 कर्मचारियों पर FIR, APCR के हस्तक्षेप के बाद हुई कार्रवाई

गुजरात, 25 अगस्त 2026: गुजरात के कच्छ जिले के भुज स्थित लोरिया गांव के मुस्लिम युवक फरीद हाजी मेर से कथित मारपीट के मामले में वन विभाग के पांच कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। यह कार्रवाई एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) के लगातार तीन दिनों तक किए गए हस्तक्षेप और अधिकारियों के समक्ष की गई शिकायतों के बाद हुई है।

APCR के मुताबिक, फरीद हाजी मेर को कथित तौर पर रास्ते में रोका गया और उनका नाम पूछा गया। आरोप है कि उनके मुस्लिम होने की जानकारी मिलने के बाद उनके साथ मारपीट की गई। घटना में फरीद गंभीर रूप से घायल हो गए। फिलहाल उनका इलाज भुज के G.K. General Hospital में चल रहा है, जहां उनकी सर्जरी भी हो चुकी है।

घटना के बाद APCR ने तुरंत संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर FIR दर्ज करने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। संगठन का कहना है कि गंभीर आरोपों के बावजूद शुरुआत में FIR दर्ज नहीं की गई। इसके बाद APCR ने लगातार तीन दिनों तक अधिकारियों के सामने मामले को उठाया और लिखित रूप से हस्तक्षेप की मांग की। इसके बाद वन विभाग के पांचों कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई।

APCR ने FIR दर्ज होने को महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि आरोप गंभीर हैं और उनकी उचित जांच जरूरी है। संगठन ने कहा कि मामले में सरकारी विभाग के कर्मचारियों के शामिल होने के कारण इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है। सरकारी कर्मचारियों से कानून के दायरे में काम करने और नागरिकों के अधिकारों व सम्मान की रक्षा करने की अपेक्षा की जाती है। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा नागरिक के साथ मारपीट या पद का दुरुपयोग किए जाने की पुष्टि होती है तो उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

FIR दर्ज करने में तीन दिन की देरी पर भी सवाल

APCR ने FIR दर्ज होने में हुई तीन दिन की देरी पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि गंभीर शारीरिक हमले का आरोप लगाने वाले किसी व्यक्ति को आपराधिक मामला दर्ज कराने के लिए बार-बार अधिकारियों के चक्कर नहीं लगाने चाहिए।

APCR ने मांग की है कि आरोपियों के सरकारी पद या विभागीय प्रभाव से जांच किसी भी तरह प्रभावित नहीं होनी चाहिए। संगठन के अनुसार, मामले की जांच स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से की जानी चाहिए ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके।

धार्मिक भेदभाव के आरोप की भी जांच की मांग

APCR ने अधिकारियों से मामले में लगाए गए धार्मिक भेदभाव के आरोप की भी जांच करने की मांग की है। संगठन ने कहा कि सभी संबंधित गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य चिकित्सकीय साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाया जाए तथा जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए।

फरीद हाजी मेर का इलाज अभी भी G.K. General Hospital में जारी है। उनके परिवार ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जताई है। APCR ने बताया कि संगठन पीड़ित परिवार को आवश्यक कानूनी सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहा है और मामले की आगे की कार्रवाई पर नजर रखेगा।

APCR ने कहा कि यह मामला सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ हिंसा या अधिकारों के दुरुपयोग के आरोपों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता को भी सामने लाता है। संगठन के अनुसार, सरकारी पद किसी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं रखता और सार्वजनिक पद का इस्तेमाल कानून से बचाव के लिए नहीं किया जा सकता।

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