नई दिल्ली, 28 अगस्त 2026: हज 2027 की तैयारियों के बीच सऊदी अरब में भारतीय हाजियों के लिए सेवा प्रदाता कंपनी के चयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पत्रकार ज़ैग़म मुर्तज़ा ने आरोप लगाया गया है कि टेंडर प्रक्रिया में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी को तकनीकी रूप से सक्षम पाए जाने के बावजूद बाहर कर दिया गया और अधिक कीमत की बोली लगाने वाली कंपनी को ठेका दिया गया। उनके मुताबिक, इससे करीब 1.22 लाख भारतीय हाजियों पर लगभग 331 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
ज़ैग़म मुर्तज़ा के अनुसार, सऊदी अरब के हज मंत्रालय ने हज 2027 के लिए Comprehensive Service Package (CSP) व्यवस्था लागू की है। इसके तहत विदेशी सरकारों को अपने हाजियों के आवास, परिवहन, भोजन और हज से जुड़ी अन्य सेवाओं के लिए एक सेवा प्रदाता कंपनी का चयन करना है। भारत में इस प्रक्रिया की जिम्मेदारी अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और हज कमेटी से जुड़ी है। भारत की ओर से 11 अगस्त को टेंडर जारी किया गया था, जिसमें 16 कंपनियों ने हिस्सा लिया और शुरुआती जांच के बाद 13 कंपनियां बाहर हो गईं।
उन्होंने बताया गया है कि वित्तीय मूल्यांकन तक पहुंची तीन कंपनियों में M/s Mashareq Al Mutamayza ने प्रति हाजी 8,717 सऊदी रियाल की सबसे कम बोली लगाई थी। वहीं M/s Ithra Al Khair ने 9,777 रियाल प्रति हाजी की सबसे अधिक बोली लगाई। यानी दोनों के बीच प्रति हाजी करीब 1,060 रियाल का अंतर था। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी न्यूनतम कोटे के लगभग 1.22 लाख हाजियों के हिसाब से यह अंतर करीब 331 करोड़ रुपये बैठता है।
सबसे बड़ा सवाल टेंडर मूल्यांकन समिति की सिफारिश को लेकर उठाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा गठित Tender Evaluation Committee (TEC) में हज कमेटी के CEO शाहनवाज़ चंदमकुझियिल समेत मंत्रालय और भारतीय मिशनों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। समिति ने कथित तौर पर Mashareq Al Mutamayza को तकनीकी मूल्यांकन में 92.13 अंक के साथ सक्षम माना था। इसके बावजूद अंतिम स्तर पर उसका टेंडर रद्द कर दिया गया और अधिक बोली लगाने वाली Ithra Al Khair को ठेका दिए जाने का दावा किया गया है।
ज़ैग़म मुर्तज़ा ने यह भी आरोप लगाया गया है कि Ithra Al Khair को लगातार चौथी बार ठेका मिला है, जबकि पिछले हज के दौरान उसकी सेवाओं को लेकर हाजियों की शिकायतें सामने आई थीं। इसके अलावा रिपोर्ट में हज यात्रियों से पहले से जमा कराए जाने वाले पैसे पर मिलने वाले ब्याज, एयरलाइन टिकटों की कीमत और 2026 में हाजियों के लिए अनिवार्य की गई GPS घड़ियों की खरीद को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। GPS घड़ियों को लेकर दावा किया गया है कि कई यात्रियों ने इनके काम न करने और बैटरी जल्दी खत्म होने की शिकायत की थी।
हालांकि, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने टेंडर प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है। मंत्रालय का कहना है कि सेवा प्रदाता कंपनी का चयन निर्धारित और पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के तहत किया गया है। ऐसे में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी को तकनीकी रूप से सक्षम पाए जाने के बावजूद क्यों हटाया गया और अधिक कीमत वाली कंपनी को ठेका क्यों दिया गया—यह सवाल अब हज 2027 की तैयारियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। ज़ैग़म मुर्तज़ा ने इस पूरे मामले में पारदर्शिता, जवाबदेही और हाजियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को लेकर मंत्रालय से स्पष्टीकरण की मांग उठाई है।

