कोलकाता: उत्तरी कोलकाता के कोसीपोर स्थित ज्योतिनगर कॉलोनी के करीब 5,000 निवासी पिछले लगभग तीन महीने से नियमित जल आपूर्ति के संकट से जूझ रहे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इलाके में पानी की सप्लाई इसलिए बंद की गई क्योंकि यहां रहने वाले अधिकांश लोग मुस्लिम हैं।
द वायर की पत्रकार अन्वेषा बनर्जी की रिपोर्ट के हवाले से द ऑब्जर्वर पोस्ट ने बताया कि 29 मई 2026 को कॉलोनी में पानी की आपूर्ति काट दी गई थी। निवासियों के मुताबिक, पीने के पानी के पांच नल बंद कर दिए गए, जिसके बाद परिवारों को दूर-दराज से पानी लाने या गंगा के पानी पर निर्भर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।
स्थानीय निवासी अकबर अली ने आरोप लगाया कि उन्होंने नगर निगम कार्यालय और पुलिस स्टेशन में कई बार शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “पानी क्यों रोका गया है? क्योंकि हम मुसलमान हैं।” कुछ निवासियों ने यह भी दावा किया कि स्थानीय भाजपा विधायक रितेश तिवारी ने उनसे कहा कि पानी की आपूर्ति इसलिए रोकी गई क्योंकि उन्होंने भाजपा को वोट नहीं दिया था। महिलाओं के एक समूह ने विधायक पर धार्मिक रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का भी आरोप लगाया है।
नियमित पेयजल की सुविधा नहीं होने के कारण कॉलोनी की महिलाएं और बच्चे पानी लेने के लिए एक किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर रहे हैं। कुछ परिवार नहाने और कपड़े धोने के लिए गंगा के पानी का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासी रोश्मिला खातून ने बताया कि नदी के गंदे पानी के इस्तेमाल से बच्चों की त्वचा पर लाल चकत्ते और अन्य समस्याएं दिखाई दे रही हैं।
निवासियों का कहना है कि जल संकट का असर बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों तथा बीमार लोगों पर भी पड़ रहा है। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि हाल ही में एक पड़ोसी के अंतिम संस्कार के दौरान भी समुदाय को साफ पानी उपलब्ध नहीं हो सका और नदी के पानी का इस्तेमाल करना पड़ा।
कॉलोनी से करीब 500 मीटर दूर स्थित एक हिंदू बस्ती के कुछ लोग कथित तौर पर जरूरत पड़ने पर मुस्लिम परिवारों के साथ पानी साझा कर रहे हैं। हालांकि, कुछ हिंदू निवासियों ने आशंका जताई कि यदि वे खुले तौर पर मुस्लिम पड़ोसियों की मदद करते हैं तो उनकी अपनी पानी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
इलाके में लंबे समय से रह रहीं सरस्वती ने छोटे बच्चों के नदी तक जाकर पानी लाने पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले एक बच्चा नदी में लगभग डूब गया था। उनका सवाल है कि ऐसी किसी दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी कौन लेगा।
स्थानीय अधिकारियों से कई बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने के बाद निवासियों ने कलकत्ता हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की है। दुकानदार मोइनुद्दीन शेख ने बताया कि प्रशासन की ओर से कोई समाधान नहीं मिलने के बाद करीब दस दिन पहले अदालत का रुख किया गया। हालांकि, याचिका पर पहली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है।
निवासियों ने उस दावे का भी विरोध किया है कि उनकी बस्ती कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट की जमीन पर बनी है और इसी वजह से उन्हें हटाने की कार्रवाई की जा रही है। बाबू गाजी ने कहा कि बस्ती कई दशकों से मौजूद है और उनके मुताबिक यह पंजीकृत भी है।
निवासियों के आरोपों को लेकर भाजपा विधायक रितेश तिवारी, कोलकाता नगर आयुक्त स्मिता पांडे और कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के जनसंपर्क अधिकारी संजय मुखर्जी से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन रिपोर्ट प्रकाशित होने तक किसी की ओर से जवाब नहीं मिला था।
असंगठित क्षेत्र श्रमिक संग्रामी मंच के उपाध्यक्ष प्रतीप नाग ने कहा कि धार्मिक आधार पर किसी की पानी की आपूर्ति रोकना अपराध माना जाना चाहिए।
फिलहाल ज्योतिनगर कॉलोनी के हजारों लोगों की सबसे बड़ी मांग साफ और सुरक्षित पेयजल की बहाली है। करीब तीन महीने से जारी संकट ने स्थानीय परिवारों के सामने स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी गंभीर परेशानियां खड़ी कर दी हैं।

