पश्चिम बंगाल में जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान ईसाई समुदाय से जुड़े कम से कम 15 कथित हमलों और घटनाओं की रिपोर्ट सामने आई है। मुस्लिम मिरर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन घटनाओं में चर्चों में तोड़फोड़, प्रार्थना सभाओं में कथित बाधा, पादरियों और श्रद्धालुओं के साथ मारपीट, धार्मिक सामग्री को नुकसान पहुंचाने और ईसाई अंतिम संस्कार में कथित हस्तक्षेप जैसे मामले शामिल हैं। ये घटनाएं दक्षिण 24 परगना, पूर्व बर्धमान, पश्चिम मेदिनीपुर, बांकुड़ा, उत्तर 24 परगना, हावड़ा और पूर्व मेदिनीपुर समेत कई जिलों से सामने आई हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में एंटी-क्रिश्चियन ट्रैकर वॉच ने पश्चिम बंगाल में नौ घटनाओं की जानकारी दी थी। हालांकि उपलब्ध सामग्री के आधार पर इनमें से आठ घटनाओं की ही स्वतंत्र रूप से पहचान की जा सकी है। 4 जुलाई को पश्चिम मेदिनीपुर के पालबाड़ी में एक निजी प्रार्थना कार्यक्रम में कथित तौर पर बाधा डाले जाने की बात सामने आई। इसके बाद 5 जुलाई को सुबाषग्राम में एक निर्माणाधीन चर्च में कथित तोड़फोड़, पूर्व बर्धमान के फरीदपुर में प्रार्थना के दौरान कथित हमला, मुर्शिदाबाद में एक ईसाई महिला पर कथित हमला और बांकुड़ा में प्रार्थना सभा बाधित किए जाने की घटनाएं रिपोर्ट हुईं।
12 जुलाई को उत्तर 24 परगना के बारासात में सेल्सियन सिस्टर्स से जुड़े परिसर में कथित तौर पर करीब 60 लोगों के पहुंचने और निर्माणाधीन चैपल व कब्रिस्तान को हटाने की मांग करने का मामला सामने आया। वहीं 26 जुलाई को दक्षिण 24 परगना के चरारॉयपुर माजेर पाड़ा में एक निजी घर में चल रही प्रार्थना सभा पर कथित हमले की बात कही गई। 31 जुलाई को संदेशखाली में एक पादरी को कथित तौर पर धमकाए जाने की घटना भी रिपोर्ट हुई। हालांकि इन घटनाओं में से कई के दावे मुख्य रूप से ईसाई संगठनों और निगरानी संस्थाओं की रिपोर्ट पर आधारित हैं।
अगस्त में भी ऐसी घटनाओं का सिलसिला जारी रहने का दावा किया गया है। 14 अगस्त को पूर्व बर्धमान के सहानगर में एक ईसाई महिला के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद सामने आया। चर्च के अनुसार, स्थानीय लोगों के विरोध के बाद शव को कब्र से निकालना पड़ा और बाद में दूसरे स्थान पर अंतिम संस्कार किया गया। हालांकि पुलिस का पक्ष इससे अलग था। पुलिस ने जमीन के रिकॉर्ड और कब्रिस्तान की वैधता की जांच की बात कही तथा मारपीट के आरोपों पर भी सवाल उठाए।
23 अगस्त को हावड़ा के उलूबेरिया में एक किराए के मकान में चल रही प्रार्थना सभा में करीब 60 लोगों के साथ कथित मारपीट और तोड़फोड़ की घटना सामने आई। पादरी के अनुसार, हमलावरों ने जबरन धर्मांतरण के आरोप लगाए। पुलिस ने शिकायत मिलने और एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि की थी। इसके बाद 25 अगस्त को हावड़ा के घुसुड़ी, 26 अगस्त को पूर्व मेदिनीपुर के चेक माइलपोस्ट और 30 अगस्त को हावड़ा के जगतबल्लवपुर तथा उत्तर 24 परगना के हिंगलगंज में प्रार्थना सभाओं से जुड़ी कथित घटनाएं सामने आईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन घटनाओं के बाद कुछ ईसाई समूहों ने सुरक्षा को लेकर घरों में होने वाली प्रार्थना सभाएं और पादरियों के दौरे कम या बंद कर दिए।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन घटनाओं में जबरन या प्रलोभन देकर धर्मांतरण के आरोप कई बार सामने आए, लेकिन केवल आरोप लगाए जाने से धर्मांतरण या किसी अपराध का साबित होना तय नहीं होता। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ मामलों में पुलिस कार्रवाई और एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य मामले मुख्य रूप से पीड़ितों, पादरियों या ईसाई संगठनों के दावों पर आधारित हैं। इसलिए इन सभी घटनाओं को न्यायिक रूप से स्थापित तथ्य के बजाय रिपोर्ट की गई घटनाओं और आरोपों के रूप में देखा जाना चाहिए।

