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ब्रिक्स 2026: फिलिस्तीन के समर्थन पर जोर, गाजा से जबरन विस्थापन का विरोध

नई दिल्ली। ब्रिक्स देशों ने फिलिस्तीन के लिए स्वतंत्र राष्ट्र के समर्थन को दोहराते हुए गाजा से फिलिस्तीनियों के किसी भी तरह के जबरन विस्थापन का विरोध किया है। नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान जारी घोषणा में गाजा में जारी मानवीय संकट, नागरिकों पर हमलों और मानवीय सहायता में रुकावट को लेकर गंभीर चिंता जताई गई।

ब्रिक्स न्यू दिल्ली घोषणा के 30 से 36वें पैराग्राफ में गाजा की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा गया कि अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद क्षेत्र में हिंसा जारी है। ब्रिक्स देशों ने गाजा में मानवीय सहायता की पूरी और बिना किसी बाधा के पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों को लागू करने पर जोर दिया।

घोषणा में फिलिस्तीनियों को गाजा से अस्थायी या स्थायी रूप से किसी भी बहाने से जबरन विस्थापित करने की नीतियों का कड़ा विरोध किया गया। ब्रिक्स ने गाजा की भौगोलिक या जनसांख्यिकीय संरचना में बदलाव को भी खारिज किया। घोषणा में कहा गया कि ऐसे कदम फिलिस्तीनी लोगों के अपरिहार्य अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं और कब्जे को वैध बनाने या लंबे समय तक बनाए रखने का कारण बन सकते हैं।

ब्रिक्स देशों ने इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के स्थायी और न्यायपूर्ण समाधान के लिए शांतिपूर्ण रास्ते को जरूरी बताया। घोषणा में फिलिस्तीनियों के आत्मनिर्णय और वापसी के अधिकार समेत उनके वैध अधिकारों को मान्यता देने की बात कही गई।

ब्रिक्स ने संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन की पूर्ण सदस्यता के समर्थन को भी दोहराया। घोषणा में अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के संबंधित प्रस्तावों के आधार पर दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन किया गया। प्रस्तावित समाधान में 1967 से पहले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के आधार पर एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना की बात कही गई है, जिसमें गाजा और वेस्ट बैंक शामिल हों तथा पूर्वी यरुशलम उसकी राजधानी हो।

घोषणा में गाजा में नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सुविधाओं पर हमलों तथा युद्ध के तरीके के रूप में भुखमरी के इस्तेमाल की निंदा की गई। मानवीय सहायता को अवैध रूप से रोकने और मानवीय सहायता के राजनीतिकरण या सैन्यीकरण के प्रयासों को भी खारिज किया गया।

ब्रिक्स देशों ने फिलिस्तीन शरणार्थियों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र एजेंसी UNRWA के प्रति अपना समर्थन दोहराया। घोषणा में कहा गया कि एजेंसी के जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए ताकि वह फिलिस्तीन शरणार्थियों को जरूरी बुनियादी सेवाएं उपलब्ध कराती रहे।

इसके अलावा ब्रिक्स ने यरुशलम की कानूनी और ऐतिहासिक स्थिति को एकतरफा तरीके से बदलने के प्रयासों को खारिज किया। धार्मिक स्थलों की पवित्रता और लोगों के वहां पहुंचने तथा धार्मिक अनुष्ठान करने के अधिकार का सम्मान करने की बात भी कही गई।

घोषणा में लेबनान के मुद्दे पर भी युद्धविराम का स्वागत किया गया और सभी पक्षों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 का पूरी तरह पालन करने की अपील की गई। ब्रिक्स ने लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की निंदा करते हुए वहां मौजूद कब्जे वाली सेनाओं की वापसी की मांग की।

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