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कर्नाटक: फार्म-7 पर रोक लगाने की मांग, मंत्री रिजवान अरशद ने मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया

बेंगलुरु: कर्नाटक कांग्रेस के मंत्री रिजवान अरशद ने राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान निजी लोगों द्वारा दाखिल किए जा रहे Form-7 आवेदनों को रोकने की मांग की है। उन्होंने कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में Form-7 आवेदन मुख्य रूप से मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक मतदाताओं के खिलाफ दाखिल किए जा रहे हैं।

रिजवान अरशद के मुताबिक, 20 अगस्त से 24 सितंबर के बीच कुल 29,360 Form-7 आपत्तियां दाखिल की गईं, जिनमें 93 प्रतिशत आवेदन निजी व्यक्तियों की ओर से किए गए। उन्होंने इन आवेदनों की संख्या और तरीके पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है कि क्या ये वास्तविक व्यक्तिगत शिकायतें हैं या मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए समन्वित तरीके से आवेदन दाखिल किए गए।

मंत्री ने भालकी और बाबलेश्वर विधानसभा क्षेत्रों का विशेष तौर पर उल्लेख किया। उनके पत्र में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, इन दोनों क्षेत्रों में केवल तीन दिनों के भीतर 4,726 Form-7 आपत्तियां दाखिल की गईं। अरशद ने आरोप लगाया कि इनमें से 87.6 प्रतिशत आपत्तियां मुस्लिम, अल्पसंख्यक और अन्य वंचित समुदायों के मतदाताओं के खिलाफ थीं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में सिर्फ 14 लोगों ने मिलकर 2,894 Form-7 आपत्तियां दाखिल कीं। बाबलेश्वर में एक व्यक्ति द्वारा 493 आपत्तियां दाखिल किए जाने का आरोप है, जिनमें 444 आवेदन मुस्लिम मतदाताओं के खिलाफ बताए गए हैं।

रिजवान अरशद ने कहा कि SIR के दौरान चुनाव आयोग पहले ही घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन और दस्तावेजों की जांच कर चुका है। ऐसे में बड़ी संख्या में अतिरिक्त Form-7 आवेदन दाखिल होने पर उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इन आवेदनों की पर्याप्त जांच की जा रही है।

मंत्री के पत्र के अनुसार, SIR प्रक्रिया के दौरान अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लीकेट और अन्य यानी ASDD श्रेणियों के तहत 1.07 करोड़ से अधिक प्रविष्टियां हटाई जा चुकी हैं। वहीं, करीब 43.81 लाख मतदाताओं के नामों को लेकर नोटिस जारी किए गए हैं, जिनकी प्रविष्टियों में कथित तौर पर कुछ विसंगतियां पाई गई हैं।

रिजवान अरशद ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मांग की है कि अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने तक निजी व्यक्तियों द्वारा दाखिल Form-7 आपत्तियों को स्वीकार करना रोका जाए। उन्होंने पहले से दाखिल आवेदनों की प्रक्रिया, जांच और निर्णय पर भी रोक लगाने की मांग की है।

उन्होंने भालकी और बाबलेश्वर में बड़ी संख्या में दाखिल किए गए Form-7 आवेदनों की जांच करने और अगर किसी व्यक्ति द्वारा गलत या दुर्भावनापूर्ण जानकारी देकर आवेदन दाखिल करना साबित हो तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने उन अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है, जिन्होंने बड़ी संख्या में दाखिल आवेदनों को बिना अतिरिक्त जांच के स्वीकार या अपलोड किया।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब कर्नाटक में SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाए जाने और Form-7 आवेदनों के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों की पुष्टि संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की जांच के बाद ही हो सकेगी।

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