ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि स्थापित राजनीतिक दल मुसलमानों का समर्थन तो लेते हैं, लेकिन उन्हें नेतृत्व और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के पर्याप्त अवसर नहीं देते। रविवार को रामपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम युवाओं में नेतृत्व करने की क्षमता है, लेकिन उन्हें आगे बढ़ने के लिए उचित मंच नहीं दिया जाता।
ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि मुस्लिम समुदाय के युवा राजनीति में आगे आएं और देश के नेतृत्व में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा, “हम किसी नेहरू, गांधी या यादव को अपना नेता नहीं बनाएंगे। ये युवा बेटे और बेटियां ही हमारे नेतृत्व में सबसे आगे खड़े होंगे।” उन्होंने जोर दिया कि वंचित समुदायों के युवाओं को राजनीति में भागीदारी, नेतृत्व और न्याय के लिए काम करने के अवसर मिलने चाहिए।
ओवैसी ने समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया कि मुसलमान लंबे समय से उसका समर्थन करते आए हैं, लेकिन शिक्षा, आर्थिक विकास और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर समुदाय को अपेक्षित लाभ नहीं मिला। उन्होंने आजमगढ़ का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि शिबली कॉलेज जैसे संस्थान को विश्वविद्यालय का दर्जा क्यों नहीं दिया गया। इसकी तुलना उन्होंने सपा के प्रभाव वाले सैफई में विकसित शैक्षणिक और खेल सुविधाओं से की।
एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को केवल स्थापित नेताओं का समर्थन करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि राजनीति में निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “मुसलमान नेता बनाने के बजाय खुद नेता बनना चाहते हैं। हम पर्दे नहीं बिछाना चाहते; हम अपने हिस्से की बात करना चाहते हैं।” उनके मुताबिक, युवाओं की राजनीतिक भूमिका केवल नारे लगाने या दूसरे नेताओं के लिए प्रचार करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
ओवैसी की ये टिप्पणियां उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आई हैं। एआईएमआईएम राज्य में अपना संगठन मजबूत करने और राजनीतिक आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। रामपुर की जनसभा में उन्होंने पार्टी समर्थकों से जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने और मतदान केंद्रों पर समर्थन जुटाने की अपील की। उन्होंने क्षेत्र में आर्थिक कठिनाइयों और शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों का मुद्दा उठाते हुए वंचित समुदायों के लिए अधिक प्रतिनिधित्व और समान अवसरों की मांग भी की।

