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कब्जे वाले वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी किसानों पर इजरायली हमले बढ़ने का खतरा, जैतून की फसल के बीच संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने जताई चिंता

कब्जे वाले वेस्ट बैंक में जैतून की फसल की कटाई शुरू होने के साथ ही फिलिस्तीनी किसानों पर इजरायली बस्तियों में रहने वाले लोगों के हमलों और धमकियों का खतरा बढ़ गया है। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए इजरायल से फिलिस्तीनी किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें अपनी जमीन तक सुरक्षित पहुंच देने की मांग की है। विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार बढ़ती हिंसा और पाबंदियों से किसानों की आजीविका, खाद्य सुरक्षा और सांस्कृतिक विरासत प्रभावित हो रही है।

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने कहा कि फिलिस्तीनी किसानों को हर साल अपनी जमीन पर काम करने के दौरान हिंसा, धमकियों और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है। जैतून की फसल की कटाई हजारों फिलिस्तीनी परिवारों के लिए आय और भोजन का प्रमुख स्रोत है। विशेषज्ञों ने कहा कि यह समय किसानों के लिए अपनी मेहनत और जमीन से मिलने वाले लाभ का आनंद लेने का होना चाहिए, लेकिन इसके बजाय उन्हें डर, नुकसान और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में जैतून की फसल से जुड़े 178 हमले दर्ज किए गए थे। इन घटनाओं से कब्जे वाले वेस्ट बैंक के 88 फिलिस्तीनी कस्बे और गांव प्रभावित हुए, जो वर्ष 2020 के बाद सबसे अधिक संख्या थी। इस दौरान 6,000 से अधिक जैतून के पेड़ों और नए पौधों को नुकसान पहुंचाया गया। यह संख्या वर्ष 2024 की तुलना में लगभग दोगुनी थी और पिछले छह वर्षों में सबसे अधिक दर्ज की गई।

विशेषज्ञों ने सितंबर 2026 में इजरायली सैन्य अधिकारियों की ओर से जारी उन आदेशों पर भी चिंता जताई, जिनमें कब्जे वाले वेस्ट बैंक के उत्तरी और मध्य हिस्सों में लगभग 3,39,000 वर्ग मीटर कृषि भूमि से वनस्पति हटाने को कहा गया। इसमें जेनिन, कबातिया और बेत रीमा के वे इलाके भी शामिल हैं, जहां जैतून के पेड़ लगे हुए हैं। इन आदेशों के तहत पेड़ों को उखाड़ने का प्रावधान है और जमीन के मालिकों को आपत्ति दर्ज कराने के लिए बेहद कम समय दिया गया है।

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने कहा कि जैतून के पेड़ फिलिस्तीनी परिवारों की आजीविका और सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा हैं। इन पेड़ों को तैयार होने में कई साल लगते हैं और ये पीढ़ियों तक परिवारों को सहारा दे सकते हैं। ऐसे पेड़ों को नष्ट करने से केवल एक मौसम की फसल का नुकसान नहीं होता, बल्कि स्थानीय खाद्य व्यवस्था, पारंपरिक जीवनशैली और भोजन के अधिकार पर भी असर पड़ता है। विशेषज्ञों ने रामल्लाह के आसपास इजरायली सैन्य बुलडोजरों द्वारा जैतून के बाग उजाड़े जाने की खबरों का भी उल्लेख किया।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि कुछ इलाकों में किसानों को अपनी जमीन तक पहुंचने के लिए पहले से समन्वय की अनुमति लेनी पड़ती है, लेकिन इजरायली अधिकारियों द्वारा ऐसी अनुमति जारी नहीं किए जाने या वापस लिए जाने से उनकी मुश्किलें बढ़ रही हैं। इस वर्ष नीति में बदलाव के बाद इजरायल द्वारा ‘राज्य की जमीन’ के रूप में वर्गीकृत क्षेत्रों में फिलिस्तीनी किसानों को अनुमति लेने और जैतून की कटाई करने से रोके जाने की भी बात कही गई है। विशेषज्ञों ने इजरायल से अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों का पालन करने, किसानों को हमलों से बचाने और उनकी जमीन तक पहुंच में बाधा नहीं डालने की अपील की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी फिलिस्तीनी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके अधिकारों के उल्लंघन के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की।

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