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दिल्ली: 300 साल पुरानी रेस कोर्स मस्जिद पर संकट, वक्फ बोर्ड ने मांगी सुरक्षा; बिजली-पानी के कनेक्शन काटने का आरोप

नई दिल्ली में स्थित लगभग 300 साल पुरानी रेस कोर्स मस्जिद की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर दिल्ली वक्फ बोर्ड ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। बोर्ड के अनुसार, 7 अक्टूबर को आसपास की झुग्गी बस्तियों में तोड़फोड़ की कार्रवाई के दौरान मस्जिद के बिजली और पानी के कनेक्शन कथित तौर पर काट दिए गए। बोर्ड ने अधिकारियों को पत्र लिखकर दोनों सुविधाएं बहाल करने और मस्जिद की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

द ऑब्जर्वर पोस्ट की 22 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तनवीर अहमद ने 19 और 21 अक्टूबर को अधिकारियों को पत्र लिखे। इन पत्रों में कहा गया कि मस्जिद में प्रतिदिन पांच वक्त की नमाज अदा की जाती है और इसके लिए बिजली तथा पानी की सुविधाएं जरूरी हैं। बोर्ड ने आरोप लगाया कि आसपास की झुग्गी बस्तियों को हटाने की कार्रवाई के दौरान बिना पूर्व सूचना और स्पष्ट कारण बताए मस्जिद के कनेक्शन काट दिए गए। बोर्ड ने यह भी कहा कि मस्जिद में वर्ष 1976 से कानूनी रूप से बिजली का कनेक्शन मौजूद था।

वक्फ बोर्ड के अनुसार, मस्जिद और उसके पास स्थित लगभग दो बीघा क्षेत्र में फैला कब्रिस्तान 8 सितंबर 1977 को जारी दिल्ली प्रशासन की राजपत्र अधिसूचना के तहत वक्फ संपत्ति के रूप में अधिसूचित है। बोर्ड ने कहा कि मस्जिद का प्रबंधन उसके सीधे नियंत्रण में है और बोर्ड द्वारा नियुक्त इमाम यहां पांच वक्त की नमाज अदा कराते हैं। बोर्ड ने यह भी उल्लेख किया कि मस्जिद को नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने विरासत संपत्ति के रूप में सूचीबद्ध किया है और यह यूएमईईडी पोर्टल पर पंजीकृत है।

मस्जिद के इमाम मौलाना एमएम हारून राही ने आरोप लगाया कि 17 अक्टूबर को कुछ लोग वहां पहुंचे, जिन्होंने खुद को भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) का अधिकारी बताया। इमाम के मुताबिक, इन लोगों ने उन्हें तीन दिनों के भीतर जगह खाली करने को कहा और चेतावनी दी कि इसके बाद मस्जिद के ढांचे को हटाया जा सकता है। हालांकि, वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तनवीर अहमद ने कहा कि मस्जिद को गिराने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया था।

इमाम ने यह भी आरोप लगाया कि लोगों को मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए आने से रोका जा रहा है। आसपास की झुग्गी बस्तियों में तोड़फोड़ के बाद मस्जिद के नजदीक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। वक्फ बोर्ड ने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराने और बिजली-पानी की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर बहाल करने की मांग की है।

रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि भूमि एवं विकास कार्यालय ने मस्जिद को कोई नोटिस जारी नहीं किया था। वहीं, बिजली और पानी के कनेक्शन काटे जाने के संबंध में एनडीएमसी की ओर से कोई जवाब सामने नहीं आया। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि मस्जिद की बुनियादी सुविधाएं किस आदेश के तहत बंद की गईं।

मस्जिद जिस क्षेत्र में स्थित है, वहां लगभग 53.2 एकड़ जमीन भूमि एवं विकास कार्यालय के स्वामित्व में है। इस जमीन के रखरखाव और विकास की जिम्मेदारी केंद्रीय लोक निर्माण विभाग को सौंपी गई है। अक्टूबर 2025 में रेस कोर्स रोड इलाके के भाई राम कैंप, मस्जिद कैंप और डीआईडी कैंप में रहने वाले झुग्गीवासियों को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर सरकारी जमीन खाली करने और सावदा घेवरा स्थित दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड की कॉलोनी में जाने को कहा गया था। ये नोटिस जनवरी 2024 में भूमि एवं विकास कार्यालय और दिल्ली विकास प्राधिकरण की ओर से किए गए संयुक्त सर्वेक्षण के बाद जारी किए गए थे।

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