नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्योगपति गौतम अडानी के कथित संबंधों पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री के प्रकाशन और प्रसार पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने 31 जनवरी 2027 तक या अगले आदेश तक रोक लगा दी है। सोमवार को न्यायमूर्ति आर्यक दत्त की पीठ ने अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की ओर से दायर मानहानि याचिका पर अंतरिम आदेश जारी किया। कंपनी ने टेक उद्यमी सबीर भाटिया और अन्य के खिलाफ याचिका दायर कर 50 करोड़ रुपये के हर्जाने और वीडियो के प्रसार पर रोक लगाने की मांग की थी।
‘द फ्रेंडशिप फाइल्स: हाउ मोदी एंड अडानी स्टोल इंडिया’ शीर्षक वाली 36 मिनट की यह वीडियो डॉक्यूमेंट्री 9 अक्टूबर को सबीर भाटिया के यूट्यूब चैनल ‘बीक्यूब्ड’ पर अपलोड की गई थी। इसके बाद इसे एक्स और अन्य सोशल मीडिया मंचों पर भी साझा किया गया। अदालत ने यूट्यूब, एक्स और इंस्टाग्राम सहित संबंधित पक्षों को वीडियो प्रकाशित करने, दोबारा अपलोड करने, साझा करने या किसी अन्य तरीके से प्रसारित करने से रोक दिया है। यह प्रतिबंध वीडियो के छोटे हिस्सों, क्लिप, संक्षिप्त संस्करणों और मूल सामग्री से काफी हद तक मिलती-जुलती प्रतियों पर भी लागू होगा।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया वीडियो एक सामान्य समाचार रिपोर्ट या किसी कार्यवाही का विवरण नहीं, बल्कि नाटकीय प्रस्तुति है, जिसमें कथनों और दृश्यों के माध्यम से आरोपों को तथ्य के रूप में पेश किया गया है। पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि डॉक्यूमेंट्री का शीर्षक चोरी का संकेत देता है और इसमें अडानी समूह के खिलाफ ऐसे आरोप लगाए गए हैं, जिन्हें किसी प्राधिकरण ने प्रमाणित नहीं किया है। अदालत ने संबंधित सोशल मीडिया मंचों को वीडियो और कथित मानहानिकारक बयानों वाली प्रतियों को हटाने तथा याचिका में उल्लिखित लिंक पर उनकी पहुंच रोकने का निर्देश दिया। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश का उद्देश्य अडानी समूह या सरकारी नीतियों की रचनात्मक आलोचना और निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर रोक लगाना नहीं है, बशर्ते उसमें प्रतिबंधित वीडियो या मामले में चिन्हित कथित मानहानिकारक बयान शामिल न हों।
अदालत ने यूट्यूब, एक्स और इंस्टाग्राम को संबंधित खातों और लिंक से जुड़े पंजीकरण विवरण, वीडियो अपलोड किए जाने के समय के इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) लॉग तथा एक्सेस लॉग सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया है। जिन खातों के संचालकों की पहचान नहीं हो सकी है, उनके संबंध में बुनियादी ग्राहक जानकारी दो सप्ताह के भीतर सीलबंद लिफाफे में हलफनामे के जरिए जमा करने को कहा गया है। इसके अलावा, संबंधित लिंक पर विज्ञापन दिखाने और वीडियो से होने वाली कमाई साझा करने पर रोक लगाई गई है। अडानी एंटरप्राइजेज ने अदालत में दावा किया कि भारत में मूल यूट्यूब वीडियो की पहुंच कथित तौर पर सरकारी शिकायत के बाद बंद कर दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद वीडियो अन्य चैनलों और सोशल मीडिया खातों के जरिए प्रसारित हो रहा था। अदालत ने प्रतिवादियों को याचिका मिलने के चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, जबकि कंपनी को जवाब पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए अतिरिक्त दो सप्ताह दिए गए हैं।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सबीर भाटिया ने सोशल मीडिया पर कहा कि अडानी एंटरप्राइजेज ने कथित प्रतिष्ठा हानि के लिए 50 करोड़ रुपये का दावा किया है, लेकिन उनके अनुसार इसका मूल्य शून्य है। दूसरी ओर, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने बताया कि उन्होंने मुंबई पुलिस आयुक्त के अनुरोध के बाद डॉक्यूमेंट्री को अपने सोशल मीडिया खातों से हटा दिया। इससे पहले वीडियो साझा करने वाले कुछ एक्स उपयोगकर्ताओं को मुंबई पुलिस ने कानूनी नोटिस जारी किए थे। ठाकरे ने दावा किया कि एक्स पर वीडियो को 48 लाख से अधिक बार देखा गया था और उन्होंने इसे जनता तक जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से साझा किया था। मामले की अगली सुनवाई जनवरी में नियमित पीठ के समक्ष होनी है।

