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पुण्यतिथि विशेष:- मौलाना हसरत मोहानी आज़ादी के महान नायक जिन्होंने “इंकलाब जिंदाबाद” का नारा दिया था

समय बदलने के साथ-साथ हम अपना इतिहास भी भूलते जा रहे है जिसके कारण आज हम एक ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानी मौलाना हसरत मोहानी की पुण्यतिथि भी भूल गए है जिन्होंने हिन्दुस्तान की आज़ादी के लिए अपना सबकुछ दाव पर लगा दिया था।

मौलाना हसरत मोहानी ने आज़ादी के समय “इंकलाब जिंदाबाद” का नारा दिया था जिस नारे ने भारतीयों के जोश को दोगुना कर दिया था आज भी जब कभी यह नारा लगता है तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।

मौलाना हसरत मोहानी का जन्म 1 जनवरी 1875 को उन्नाव के कस्बा मोहान (उत्तर प्रदेश) में हुआ। मौलाना हसरत मोहानी कॉलेज के जमाने से ही आज़ादी की लड़ाई में शामिल हो गए थे।

कॉलेज से निकलने के बाद हसरत मोहानी ने उर्दू मैगज़ीन “उर्दू ए मोअल्ला” निकालनी शुरू की थी जिसमें वह जंग ए आज़ादी के समर्थन में लेख लिखते थे।

मौलाना हसरत मोहानी ने 1919 के खिलाफत आंदोलन में भी चढ़ बढ़ कर हिस्सा लिया। तथा 1921 में उन्होंने सबसे पहले “इन्कलाब ज़िदांबाद” का नारा भी अपनी कलम से लिखा था।

मौलाना हसरत मोहानी बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के करीबी दोस्त थे। तथा हिन्द-मुस्लिम एकता के समर्थक थे। 1946 में जब भारतीय संविधान सभा का गठन हुआ तो उन्हें उत्तर प्रदेश से संविधान सभा का सदस्य चुना गया।

मौलाना हसरत मोहानी ने 1947 के भारत विभाजन का विरोध करते हुए खुशी-खुशी हिन्दुस्तान में रहना पसंद किया।

वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापकों में से एक थे। 1907 में अंग्रेजो के विरूद्ध एक लेख प्रकाशित करने पर उन्हें जेल भेज भी जाना पड़ा था। जिसके बाद 1947 तक वह कई बार क़ैद और रिहा हुए।

बार-बार जेल जाने के कारण उनकी माली हालत तबाह हो गई थी। जिसके कारण उनका रिसाला भी बंद हो गया।

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