ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मंगलवार को दावा किया कि ईरान ने हालिया संघर्ष में “युद्ध और कूटनीति दोनों में जीत हासिल की है।” उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने शुरुआत में तेहरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” करने की मांग की थी, बाद में वही बातचीत की अपील करने लगे।
तसनीम समाचार एजेंसी के मुताबिक, एक कार्यक्रम में बोलते हुए अराघची ने कहा कि ईरान ने कई दिनों तक ऐसी सैन्य ताकत का सामना किया, जिसे उन्होंने “दुनिया की सबसे बड़ी स्पष्ट सैन्य शक्ति” बताया।
उनके मुताबिक, इस सैन्य शक्ति को पश्चिमी देशों और क्षेत्र के भीतर तथा बाहर मौजूद कई अन्य देशों का समर्थन हासिल था। अराघची ने दावा किया कि युद्ध शुरू होने के कुछ ही समय बाद ईरान के आत्मसमर्पण की मांग करने वाले पक्ष ने बातचीत का रास्ता अपनाना शुरू कर दिया।
उन्होंने कहा कि तेहरान ने शुरुआत में युद्धविराम के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और लड़ाई तब तक जारी रखी, जब तक दूसरी तरफ से युद्धविराम और बातचीत को “ईरान की शर्तों पर” स्वीकार नहीं कर लिया गया।
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा, “हमने पूरी ताकत से लड़ाई लड़ी और पूरी ताकत से बातचीत की।” उन्होंने यह भी दावा किया कि कई विदेश मंत्रियों ने उनसे कहा कि ईरान ने “युद्ध और कूटनीति दोनों में जीत हासिल की।”
अराघची की यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सोमवार को ईरान से आत्मसमर्पण करने और “सफेद झंडा उठाने” के आह्वान के बाद आई है। ट्रंप के बयान और ईरान के विदेश मंत्री के दावे के बीच दोनों देशों के बीच जारी तनाव को लेकर एक बार फिर कूटनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

