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जमीअत उलमा हिंद ने मेवात के दंगा और बुलडोजर पीड़ितों को समर्पित की जफरुद्दीन नगर कॉलोनी, मौलाना महमूद मदनी बोले- हम केवल घर नहीं बनाते बल्कि टूटे हुए दिलों को भी जोड़ते हैं

जमीअत उलमा हिंद द्वारा निर्मित फिरोजपुर झिरका में स्थिति ’जफरुद्दीन नगर’ कॉलोनी का उद्घाटन आज एक संक्षिप्त समारोह में किया गया. यह कॉलोनी दंगा और बुलडोजर पीड़ितों को समर्पित की गई है।

इस अवसर पर जमीअत उलमा हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने अहमद भाई, तैयब भाई और उनकी बहन को घरों की चाबियां सौंपी।

अपने संबोधन में मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने जमीअत उलमा-ए-हिंद मौलाना महमूद असद मदनी के नेतृत्व में जमीअत की सामाजिक एवं राष्ट्रीय सेवाओं का परिचय प्रस्तुत किया और बताया कि जमीअत उलमा, मेवात दंगा पीड़ितों के पुनर्वास के अलावा कानूनी सहायता भी प्रदान कर रही है।

उन्होंने कहा कि जमीअत उलमा हिंद मानवता के आधार पर काम करती है। आरंभ से ही उसकी विचारधारा और उसकी सोच यही रही है कि देश और राष्ट्र दोनों का निर्माण किया जाए और उसने अपनी सौ साल की यात्रा में इसे व्यवहारिक रूप से साबित भी किया है। उन्होंने बताया कि इस कॉलोनी का नाम जमीअत उलमा, दिल्ली प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष और मदरसा बाब-उल-उलूम जाफराबाद के संस्थापक मौलाना मुफ्ती जफरुद्दीन साहब पर रखा गया है। मौलाना मूल रूप से मेवात के रहने वाले थे।

इस अवसर पर मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने जमीअत उलमा हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी का संदेश सुनाया कि “हम पीड़ितों की मदद करके केवल उनके लिए घरों का ही निर्माण नहीं करते हैं बल्कि उनके टूटे-बिखरे हुए दिलों को भी जोड़ते हैं। किसी व्यक्ति के जीवन में सबसे कठिन समय तब आता है जब उसका घर अचानक तोड़ दिया जाए। इसमें कोई व्यक्ति नहीं बल्कि एक परिवार प्रभावित होता है, लेकिन निराशाजनक बात यह है कि भारत जैसे कल्याणकारी देश में सरकार और एजेंसियां अपनी विफलता को छिपाने के लिए ऐसा कदम उठाती हैं जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश को बदनामी का सामना करना पड़ता है।’’ मौलाना मदनी ने जमीअत मेवात रिलीफ कमेटी और अन्य लोगों को धन्यवाद दिया, जिनकी दिन-रात की मेहनत का यह फल है। कल्याणकारी एवं मानवतावादी प्रक्रिया में भाग लेने वाले लोगों को ईश्वर उसका प्रतिफल देगा।

उन्होंने लोगों को धैर्य रखने और दृढ़ रहने और अल्लाह की ओर रुख करने का आह्वान किया और सलाह दी कि अपनी पीढ़ी के धर्म एवं आस्था की रक्षा के लिए अपने क्षेत्रों में मकतब (धार्मिक पाठशाला) स्थापित करें। मौलाना मदनी ने कहा कि एक प्रभावी और उपयोगी समाज का निर्माण इसके बिना संभव नहीं है कि हम अपनी पीढ़ी को अच्छा इंसान बनाएं।

आज जब पीड़ितों को मकान की चाबियां सौंपी जा रही थीं, तो उस समय पीड़ितों का दिल भर आया, उन्होंने चार माह पहले अपने घरों को टूटते हुआ देखा था, दोबारा घर पाकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस अवसर पर जमीअत उलमा-ए-हिंद यूके के चेयरमैन मौलाना सईद अहमद, अलहाज बशीर अहमद तमुल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे, जबकि समारोह की अध्यक्षता जमीअत उलमा संयुक्त पंजाब के नाजिम-ए-आला मौलाना मोहम्मद याह्या करीमी ने की। संचालन का दायित्व जमीअत उलमा मेवात के महासचिव मुफ्ती सलीम अहमद साकरस ने निभाया। जफरुद्दीन नगर के संरक्षक जमीअत उलमा संयुक्त पंजाब के उपाध्यक्ष मास्टर मोहम्मद कासिम ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। इसके अलावा जमीअत उलमा हिंद के वरिष्ठ संयोजक हजरत मौलाना गय्यूर कासमी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। समारोह का समापन जमीअत उलमा हिंद यूके के अध्यक्ष मौलाना सईद अहमद की दुआ के साथ हुआ।

जमीअत उलमा के स्थानीय पदाधिकारियों में कारी मोहम्मद असलम बडेडवी, अध्यक्ष जमीअत उलमा मेवात, मौलाना कमरुद्दीन, अध्यक्ष जमीअत उलमा फिरोजपुर झिरका क्षेत्र, मास्टर शमसाद, मौलाना हसन मोहम्मद हरवाड़ी अध्यक्ष जमीअत उलमा ब्लॉक फिरोजपुर झिरका, मास्टर किफायतुल्लाह, मौलाना मोहम्मद दाऊद अमीनी अध्यक्ष दीनी तालीमी बोर्ड जमीअत उलमा दिल्ली प्रदेश, कारी मोहम्मद जकरिया, मोहम्मद आलम गमाट महासचिव ब्लॉक नगीना कारी इमरान आदि उपस्थित रहे।

प्रतिनिधिमंडल ने मदरसा अबी बिन काब घासीड़ा में जमीअत यूथ क्लब के युवाओं से मुलाकात की और नगीना में मौलाना ताहिर, इमाम शाही ईदगाह मस्जिद के साथ घरों का निरीक्षण किया और मस्जिद अबु हुरैरा की दुआ कराई। अब्दुर्रहीम नगर में एक मकतब (धार्मिक पाठशाला) की आधारशिला भी रखी गई।

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