क्षत्रिय परिषद ने कोटद्वार में एक मुस्लिम दुकानदार को कथित तौर पर बजरंग दल के सदस्यों द्वारा की गई प्रताड़ना, धमकी और दबाव के मामले में कड़ा रुख अपनाया है।
परिषद ने इस पूरे प्रकरण में हस्तक्षेप करने वाले विजय रावत और दीपक कुमार के समर्थन में आधिकारिक बयान जारी करते हुए उनके खिलाफ की जा रही कथित कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
परिषद के अनुसार, विजय रावत और दीपक कुमार ने एक अवैध स्थिति को और बिगड़ने से रोकने तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से हस्तक्षेप किया था। संगठन का कहना है कि दोनों ने भीड़ के दबाव और कथित intimidation के खिलाफ खड़े होकर कानून के समक्ष समानता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और वैध व्यवसाय के अधिकार जैसे संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की।
क्षत्रिय परिषद ने यह भी आरोप लगाया कि जिन लोगों ने दुकानदार को धमकाया और प्रताड़ित किया, उनके खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई करने के बजाय, उल्टा विजय रावत और दीपक कुमार को कथित रूप से डराने-धमकाने के उद्देश्य से उनके खिलाफ लामबंदी की गई। परिषद ने विजय रावत की गिरफ्तारी की खबरों को अत्यंत चिंताजनक बताया है।
क्षत्रिय परिषद की प्रमुख मांगें:
कोटद्वार में प्रताड़ना, धमकी और हिंसा के लिए उकसाने वालों के खिलाफ तत्काल और कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
विजय रावत और दीपक कुमार के जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उन्हें तुरंत पुलिस सुरक्षा दी जाए।
विजय रावत की गिरफ्तारी से जुड़े पूरे मामले में पारदर्शिता, विधिसम्मत प्रक्रिया और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
राज्य सरकार स्पष्ट करे कि कानून-व्यवस्था पर भीड़ के दबाव या गैर-कानूनी ताकतों का प्रभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
परिषद ने देशभर की नागरिक समाज संगठनों और सामाजिक संस्थाओं से अपील की है कि वे विजय रावत और दीपक कुमार के समर्थन में एकजुट होकर खड़े हों।
संगठन ने कहा कि इस तरह की घटनाएं कानून के शासन को कमजोर करती हैं और समाज में भय का माहौल पैदा करती हैं।

