इंडियन मुस्लिम्स फॉर सिविल राइट्स (IMCR) ने प्रख्यात इस्लामी विद्वान, चिंतक, निर्भीक वक्ता, लेखक और भारतीय मुस्लिम समाज की सबसे प्रभावशाली आवाज़ों में से एक मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी के निधन पर गहरा दुख और शोक व्यक्त किया है। संगठन ने उनके निधन को न केवल भारत के मुस्लिम समुदाय बल्कि पूरे मुस्लिम जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।
अपने शोक संदेश में आईएमसीआर ने कहा कि मौलाना सलमान हुसैनी नदवी इल्म, बौद्धिक जागरूकता, दावत-ए-दीन, सामाजिक सुधार तथा मुस्लिम उम्मत की एकता और सामूहिक चेतना के प्रतीक थे।
उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन इस्लाम के प्रचार-प्रसार, इस्लामी शिक्षा के विकास, मुस्लिम समाज के मार्गदर्शन, नई पीढ़ी के बौद्धिक एवं नैतिक निर्माण तथा उम्मत के समक्ष मौजूद चुनौतियों के समाधान के लिए समर्पित कर दिया। उनके निधन से जो बौद्धिक और शैक्षणिक रिक्तता उत्पन्न हुई है, उसकी भरपाई करना अत्यंत कठिन होगा।
आईएमसीआर के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब ने अपने शोक संदेश में कहा:
«”मौलाना सलमान हुसैनी नदवी का निधन मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से अत्यंत दुखद है। वह मुझसे लगभग दस वर्ष छोटे थे। जब वह दारुल उलूम नदवतुल उलमा में अध्ययनरत थे, तब मैं अक्सर वहां जाया करता था और उनके परिवार से मेरे घनिष्ठ संबंध थे। उसी समय उनकी असाधारण प्रतिभा, गहन ज्ञान, प्रभावशाली वक्तृत्व और विलक्षण क्षमता को देखकर मुझे विश्वास हो गया था कि यह युवा एक दिन मुस्लिम समाज का मार्गदर्शक बनेगा, और इतिहास ने इसे सत्य साबित किया। वह एक बेमिसाल वक्ता, निर्भीक दाई, प्रतिष्ठित इस्लामी विद्वान और गहरे चिंतक के रूप में उभरे, जिनकी विद्वता और बौद्धिक योगदान ने पूरी दुनिया में भारतीय मुसलमानों का प्रतिनिधित्व किया।”»
मोहम्मद अदीब ने आगे कहा कि मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी ने केवल इस्लामी शिक्षा के प्रचार-प्रसार में ही उल्लेखनीय भूमिका नहीं निभाई, बल्कि मुस्लिम समाज के समकालीन सामाजिक, बौद्धिक और धार्मिक मुद्दों पर हमेशा स्पष्ट, साहसिक और संतुलित विचार प्रस्तुत किए।
वह मुस्लिम एकता, भाईचारे, अंतरराष्ट्रीय इस्लामी सहयोग तथा नई पीढ़ी की धार्मिक और नैतिक शिक्षा के प्रबल समर्थक थे। अपने भाषणों, लेखन और विद्वतापूर्ण सभाओं के माध्यम से उन्होंने लाखों लोगों को प्रेरित किया और उन्हें इस्लाम से गहराई से जोड़ा।
उन्होंने कहा कि मौलाना का पूरा जीवन ईमानदारी, इल्म, दावत, इस्लाह, सत्य के पक्ष में निर्भीकता तथा उम्मत की भलाई की चिंता का जीवंत उदाहरण था। वह भारतीय उपमहाद्वीप की उस समृद्ध इस्लामी विद्वत परंपरा के सच्चे संरक्षक थे, जिसने हमेशा संतुलन, बुद्धिमत्ता, दूरदर्शिता और मुस्लिम उम्मत की एकता का संदेश दिया।
उनकी सेवाओं को हमेशा याद रखा जाएगा और आने वाली पीढ़ियां उनकी बौद्धिक एवं शैक्षणिक विरासत से लाभान्वित होती रहेंगी।
आईएमसीआर ने दुआ की कि अल्लाह तआला मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी पर अपनी असीम रहमत नाज़िल फरमाए, उनकी नेकियों को कबूल करे, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता करे तथा उनके परिवार, रिश्तेदारों, शिष्यों और पूरे भारतीय मुस्लिम समाज को सब्र-ए-जमील प्रदान करे।

