अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की जमीन पर नगर निगम ने की बाड़बंदी, विश्वविद्यालय ने लगाया जबरन कब्जे का आरोप
अलीगढ़, 23 अगस्त 2026: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) और अलीगढ़ नगर निगम के बीच जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। नगर निगम ने 20 अगस्त को एएमयू की राइडिंग फील्ड से जुड़ी करीब 3.8 एकड़ जमीन पर बाड़बंदी कर दी। विश्वविद्यालय का दावा है कि इस जमीन की कीमत करीब 500 करोड़ रुपये है और यह कानूनी रूप से एएमयू की संपत्ति है। वहीं नगर निगम ने जमीन पर अपना स्वामित्व होने का दावा किया है।
नगर निगम की कार्रवाई के बाद एएमयू की कुलपति प्रोफेसर नईमा खातून के नेतृत्व में विश्वविद्यालय की एक टीम मौके पर पहुंची। कुलपति ने नगर निगम की कार्रवाई को “अनुचित और अस्वीकार्य कदम” बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय इस मामले को अदालत में चुनौती देगा। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी नोटिस के विश्वविद्यालय की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की गई है।
एएमयू के अनुसार, विवादित जमीन 1925 से विश्वविद्यालय के अधिकार में है। विश्वविद्यालय का कहना है कि यह जमीन 13 जून 1925 को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत अधिग्रहित की गई थी और बाद में 19 नवंबर 1940 को संयुक्त प्रांत के राज्यपाल द्वारा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के लिए आरक्षित की गई थी। विश्वविद्यालय ने दावा किया है कि उसके पास राजस्व रिकॉर्ड, अभिलेखीय दस्तावेज और अन्य कानूनी प्रमाण मौजूद हैं।
विश्वविद्यालय ने यह भी आरोप लगाया कि उसके राजस्व रिकॉर्ड में वर्ष 1992 में कथित तौर पर बिना सक्षम प्राधिकारी के आदेश के छेड़छाड़ की गई। एएमयू का कहना है कि उसे इस कथित बदलाव की जानकारी 2003 में हुई और तब से वह रिकॉर्ड दुरुस्त कराने की प्रक्रिया में है। विश्वविद्यालय ने 29 मार्च 2025 को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष राजस्व रिकॉर्ड में सुधार के लिए अपना दावा पेश किया था, जो अभी एसडीएम, कोल के समक्ष लंबित है।
एएमयू के प्रॉक्टर नवेद खान ने बताया कि जमीन के स्वामित्व का विवाद 2023 से स्थानीय एसडीएम के समक्ष लंबित है और विश्वविद्यालय अपने सभी दस्तावेज वहां जमा कर चुका है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत भी हुई है और विश्वविद्यालय को मामले के सौहार्दपूर्ण समाधान की उम्मीद है।
इस बीच, एएमयू टीचर्स एसोसिएशन ने भी नगर निगम की कार्रवाई को गंभीरता से लिया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष तुफैल अहमद ने कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़े लोग इस मामले को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करेंगे। जरूरत पड़ने पर उच्च न्यायालय का रुख करने की बात भी कही गई है।
अलीगढ़ नगर निगम ने एएमयू के दावे को खारिज करते हुए कहा है कि उसके रिकॉर्ड में यह जमीन पिछले करीब 40 वर्षों से नगर निगम की संपत्ति दर्ज है। नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार यह भूखंड नगर निगम का है और निगम जल्द ही इस जमीन पर महत्वपूर्ण शहरी परियोजनाओं का निर्माण शुरू करने की योजना बना रहा है।
वहीं जिला प्रशासन ने कहा है कि जमीन के स्वामित्व का फैसला दोनों पक्षों की बात और दस्तावेजों की जांच के बाद किया जाएगा। जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने कहा कि दोनों पक्षों को नोटिस जारी किए जाएंगे और अभिलेखों, पुराने दस्तावेजों तथा राजस्व रिकॉर्ड की जांच के बाद निर्णय लिया जाएगा।
एएमयू और नगर निगम के बीच जमीन को लेकर विवाद नया नहीं है। 30 अप्रैल 2025 को नगर निगम ने भमौला मासी गांव में करीब 41 बीघा जमीन पर कब्जा लेने की कार्रवाई की थी। यह जमीन लंबे समय से मुस्लिम यूनिवर्सिटी राइडिंग क्लब के मैदान के रूप में इस्तेमाल होती रही है। उस समय विवादित जमीन की बाजार कीमत 126 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी।
नगर निगम ने आरोप लगाया था कि एएमयू सरकारी जमीन के बड़े हिस्से पर अवैध कब्जा किए हुए है। इसके जवाब में विश्वविद्यालय ने कहा था कि जमीन कानूनी रूप से अधिग्रहित की गई थी और दशकों से उसके शांतिपूर्ण कब्जे में है।
मई 2025 में एएमयू के 23 छात्रों ने नगर निगम की कथित कार्रवाई के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। छात्रों ने नगर निगम पर मनमानी और अवैध तरीके से जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया था। हालांकि 28 मई 2025 को हाईकोर्ट ने छात्रों की याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि याचिका खारिज किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि उसने जमीन के स्वामित्व को लेकर नगर निगम या एएमयू के पक्ष में कोई राय दी है।
जमीन विवाद को लेकर कुछ एएमयू छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। एएमयू के कानून के छात्र और कानूनी पेशे से जुड़े सैयद कैफ हसन ने आरोप लगाया कि 2025 में छात्रों द्वारा हाईकोर्ट का रुख किए जाने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनका पर्याप्त समर्थन नहीं किया।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विश्वविद्यालय के पास जमीन के स्वामित्व से जुड़े पर्याप्त दस्तावेज हैं, तो प्रशासन ने पहले ही अदालत का रुख क्यों नहीं किया। उनका कहना है कि हाईकोर्ट में छात्रों की याचिका खारिज होने के बाद विश्वविद्यालय के पास कानूनी कार्रवाई करने के लिए करीब एक वर्ष का समय था।
फिलहाल जमीन के स्वामित्व को लेकर एएमयू और नगर निगम दोनों अपने-अपने दावे पर कायम हैं। जिला प्रशासन के मुताबिक विवादित जमीन पर एएमयू का मौजूदा कब्जा फिलहाल यथावत रहेगा। प्रशासन दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के बाद यह तय करेगा कि जमीन का कानूनी स्वामित्व किसके पास है।

