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मुस्लिम लीडरों ने किया 51 सदस्यीय कमेटी का ऐलान, भारतीय मुसलमानों से जुड़े मुद्दों पर करेगी काम

मुस्लिम नेताओं और बुद्धिजीवियों के 24 जुलाई को हुए राष्ट्रीय सम्मेलन में लिए गए फैसले के बाद 51 सदस्यीय राष्ट्रीय निगरानी समिति का ऐलान किया गया है। समिति में सामाजिक, धार्मिक, कानूनी, राजनीतिक और सिविल सोसाइटी से जुड़े प्रमुख लोगों को शामिल किया गया है। समिति का उद्देश्य भारतीय मुसलमानों के अधिकारों, नागरिक अधिकारों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और अन्य मुद्दों को संवैधानिक, कानूनी और लोकतांत्रिक तरीकों से उठाना है।

नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में समिति के कई सदस्यों ने इसके उद्देश्यों और आगे की रणनीति के बारे में जानकारी दी। समिति की 24वीं बैठक में तय किया गया कि देश के उन इलाकों का दौरा किया जाएगा, जहां समुदाय गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसी क्रम में उत्तराखंड को पहला दौरा तय किया गया।

एक प्रतिनिधिमंडल ने देहरादून पहुंचकर सिविल सोसाइटी और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं। बैठकों में राज्य की मौजूदा स्थिति और स्थानीय स्तर पर सामने आ रही चिंताओं पर चर्चा हुई।

पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि यह पहल किसी से अधिकार मांगने या भीख मांगने की नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक के समान अधिकारों को सामने रखने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि देश की विविधता के बावजूद सभी नागरिकों के अधिकार बराबर हैं और लोगों से इस पहल के साथ जुड़कर काम करने की अपील की। वहीं मौलाना अत्ताउर रहमान कासमी ने कहा कि यह मुहिम केवल शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि गांवों और देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचनी चाहिए, ताकि खुद को कमजोर और हाशिये पर महसूस करने वाले लोगों को सहारा मिल सके।

मोहम्मद अदीब ने स्पष्ट किया कि समिति का काम राजनीतिक दायरे में है और यह किसी पर्सनल लॉ बोर्ड या जमाअत के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी के विरोध में खड़ा होना नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर काम करना है। वहीं नदीम खान ने देश के विभिन्न हिस्सों में कथित ध्वस्तीकरण, विस्थापन, पुशबैक और धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उनकी टीमें जमीन पर काम कर रही हैं, घटनाओं का दस्तावेज तैयार कर रही हैं और प्रभावित लोगों से बातचीत कर रही हैं।

सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने इसे एक बड़ी मुहिम की शुरुआत बताते हुए कहा कि समिति में देश के अलग-अलग हिस्सों और विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व है। उन्होंने कहा कि समिति हालात पर लगातार नजर रखेगी और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करेगी। उनके मुताबिक, इसका काम केवल मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश के हितों से जुड़ा होगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस इकबाल अहमद अंसारी, मौलाना मोहसिन अली तकवी, फुजैल अहमद अय्यूबी और एसक्यूआर इलियास समेत अन्य सदस्यों ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने देश में नागरिक अधिकारों, प्रतिनिधित्व, SIR, NRC, UCC, धार्मिक संस्थानों और कथित हिंसा व विस्थापन जैसे मुद्दों पर चिंता जताते हुए सामूहिक और लोकतांत्रिक तरीके से काम करने की जरूरत बताई। कार्यक्रम का संचालन IMCR के सचिव आजम बेग ने किया।

समिति के मुताबिक, वह ऐसे मुद्दों की पहचान करेगी जिनमें हस्तक्षेप की जरूरत है और उपलब्ध संवैधानिक व कानूनी विकल्पों पर विचार करेगी। इसके अलावा संबंधित सरकारी और संवैधानिक संस्थाओं के साथ संवाद तथा जरूरत पड़ने पर राजनीतिक और लोकतांत्रिक माध्यमों से कार्रवाई की जाएगी। 51 सदस्यीय समिति के साथ 10 सदस्यीय सचिवालय भी बनाया गया है, जो विभिन्न मामलों की निगरानी और समन्वय का काम करेगा।

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