Journo Mirror
India

मुंबई में बकरीद को लेकर नया नियम, हाउसिंग सोसाइटी और घरों में कुर्बानी के लिए बकरा रखने पर रोक

मुंबई: महाराष्ट्र के मीरा-भायंदर में बकरीद के दौरान कुर्बानी के लिए खरीदे गए बकरों को घरों, फ्लैटों और हाउसिंग सोसाइटी परिसर में रखने पर रोक लगा दी गई है। मीरा-भायंदर नगर निगम ने 19 अगस्त को एक प्रस्ताव पारित कर कुर्बानी के लिए लाए गए बकरों को आवासीय परिसरों, दुकानों, घरों और सार्वजनिक स्थानों पर रखने तथा इन जगहों पर कुर्बानी करने पर प्रतिबंध लगाया है।

नगर निगम के नए नियमों के मुताबिक, बकरीद के दौरान कुर्बानी केवल नगर निगम द्वारा निर्धारित स्थानों पर ही की जा सकेगी। इसके अलावा अस्थायी बकरीद मंडप लगाने के लिए भी अनुमति लेना जरूरी होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर नगर प्रशासन 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगा सकता है और शिकायत या कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। हालांकि, नगर निगम की ओर से जारी सर्कुलर में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि निर्धारित कुर्बानी स्थल कहां-कहां बनाए जाएंगे और उनकी व्यवस्था किस तरह होगी।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब करीब चार महीने पहले मीरा रोड की एक हाउसिंग सोसाइटी में बकरों को लेकर सांप्रदायिक तनाव पैदा हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम परिवारों द्वारा कुर्बानी के लिए बकरे सोसाइटी में लाए जाने का हिंदुत्व संगठनों ने विरोध किया था। विरोध के दौरान कथित तौर पर कुछ हिंदुत्व कार्यकर्ताओं ने सोसाइटी परिसर में सुअर लाने की कोशिश भी की थी।

नगर निगम के फैसले को लेकर मुस्लिम परिवारों में नाराजगी सामने आई है। पूनम एस्टेट की निवासी रेहाना बस्तिवाला ने कहा कि बकरीद की तैयारी के दौरान बकरे को घर लाना, उसे खाना खिलाना और कुछ दिनों तक उसकी देखभाल करना उनके लिए धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर घर या सोसाइटी में बकरा रखने की अनुमति नहीं होगी तो परिवार उसे कहां रखेंगे।

बस्तिवाला ने कहा कि यह फैसला उन्हें एक समुदाय को निशाना बनाने वाला प्रतीत होता है। उनका कहना है कि धार्मिक त्योहार मनाने के लिए लोगों को अधिकारियों और पड़ोसियों से अनुमति या सहयोग मांगने की स्थिति में नहीं होना चाहिए।

वहीं, पूनम एस्टेट में रहने वाले कारोबारी तनवीर एम. खान ने इस आदेश को मुस्लिम धार्मिक प्रथाओं को “आपराधिक बनाने” की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि संविधान नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है और नए नियम मुस्लिम परिवारों पर आर्थिक और व्यावहारिक बोझ बढ़ा सकते हैं।

नगर निगम ने अपनी नीति को सार्वजनिक स्वच्छता, कानून-व्यवस्था और नागरिकों की धार्मिक एवं सामाजिक भावनाओं के सम्मान से जोड़कर पेश किया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध, अवैध परिवहन, मांस की दुकानों से निकलने वाले कचरे का सड़कों पर फेंका जाना और खुले में मांस प्रदर्शित करना नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

नगर निगम ने मांस की दुकानों को लेकर भी कुछ नियम बनाए हैं, जिनमें मांस को खुले तौर पर प्रदर्शित करने पर रोक और दुकानों पर दृश्य अवरोध लगाने जैसे प्रावधान शामिल हैं।

हालांकि, मुस्लिम निवासियों का सवाल है कि स्वच्छता और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुर्बानी के लिए खरीदे गए बकरे को कुछ दिनों तक घर या आवासीय परिसर में रखने पर पूरी तरह रोक लगाना कितना जरूरी है, खासकर तब जब वहां कुर्बानी नहीं की जा रही हो।

नए नियमों से नाराज कुछ निवासी अब नगर निगम के फैसले को अदालत में चुनौती देने पर विचार कर रहे हैं। उनका कहना है कि घरों और हाउसिंग सोसाइटी में बकरों को अस्थायी रूप से रखने पर रोक मुस्लिम परिवारों के लिए बकरीद मनाना मुश्किल बना सकती है।

तनवीर खान ने कहा कि उन्हें देश के कानून और संविधान पर भरोसा है और वे इस प्रस्ताव को वापस लेने की मांग को लेकर अदालत का रुख करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन को सांप्रदायिक तनाव पैदा करने वाले तत्वों पर कार्रवाई करनी चाहिए, न कि धार्मिक त्योहार मनाने वाले लोगों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाना चाहिए।

नगर निगम आयुक्त राधाबिनोद अभिराम शर्मा से इस फैसले के क्रियान्वयन, निर्धारित कुर्बानी स्थलों की व्यवस्था और नागरिकों की राय को लेकर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। जवाब मिलने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।

Related posts

Leave a Comment