1979 से अबतक ईरान ने इतने भारी जनाज़े उठा लिए हैं कि अब हर ताबूत हल्का नज़र आता है, राष्ट्रपति और विदेश मंत्री तक की मौत किसी ईरानी को विचलित नहीं करती: जैगम मुर्तजा
1 फरवरी, 1979 को तक़रीबन चौदह बरस के वनवास के बाद आयतुल्लाह सैयद रुहुल्लाह ख़ुमैनी तेहरान पहुंचे। शहर में मार्शल लाॅ लगा था लेकिन ख़ुमैनी

