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राजस्थान: सीमावर्ती गांवों में मस्जिदों के ध्वस्तीकरण के विरोध में हिंदू-मुस्लिम एकजुट, सरकार से कार्रवाई रोकने की मांग

राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर सहित सीमावर्ती जिलों में मस्जिदों और अन्य मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर चल रही ध्वस्तीकरण कार्रवाई के विरोध में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया।

‘सर्व धर्म शांति सभा’ के बैनर तले आयोजित इन प्रदर्शनों में दोनों समुदायों ने एक साथ मार्च निकालकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और धार्मिक स्थलों पर किसी भी कार्रवाई से पहले कानून के तहत उचित प्रक्रिया अपनाने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है, तो सभी धार्मिक स्थलों पर समान नियम लागू होने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल मस्जिदों और मुस्लिम धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है।

पराडिया गांव के सरपंच सुरताराम मेघवाल ने कहा कि बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के धार्मिक ढांचों को गिराना गलत है। उन्होंने कहा कि यदि मस्जिदों की जांच हो रही है तो मंदिरों की भी समान मानकों पर जांच होनी चाहिए। उनके अनुसार, इस आंदोलन ने गांवों में भाईचारे को और मजबूत किया है तथा हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय एक-दूसरे के साथ खड़े हैं।

प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि उनके गांवों में वर्षों से सांप्रदायिक सौहार्द कायम है और बाहरी राजनीतिक माहौल उनकी एकता को प्रभावित नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी धर्म का विरोध नहीं बल्कि न्याय, कानून के समान पालन और सामाजिक सद्भाव की रक्षा करना है।

जैसलमेर में प्रदर्शन में शामिल लोगों ने भी कहा कि धार्मिक स्थलों को बिना स्थानीय लोगों से संवाद और कानूनी प्रक्रिया पूरी किए नहीं गिराया जाना चाहिए। उनका कहना था कि कई पुराने धार्मिक स्थल दोनों समुदायों की आस्था का केंद्र रहे हैं।

इस बीच, सोशल मीडिया पर कई लोगों ने हिंदू-मुस्लिम एकता की सराहना की। वहीं एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) ने दावा किया कि राजस्थान के चार सीमावर्ती जिलों में लगभग 350 मस्जिदों को नोटिस जारी किए गए हैं।

प्रशासन इस अभियान को अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई बता रहा है, जबकि कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि नियमों का इस्तेमाल चुनिंदा तौर पर मुस्लिम धार्मिक स्थलों के खिलाफ किया जा रहा है।

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