चुनाव

उत्तर प्रदेश: समाजवादी पार्टी ने कैसरगंज से मसूद आलम का टिकट काटकर आनंद यादव को बनाया उम्मीदवार

मसूद आलम के समर्थकों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया तथा अखिलेश यादव से वापस टिकट देने की मांग की

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की वोटिंग में अब कुछ ही दिन बाकी हैं. ऐसे में सभी राजनीतिक दलों ने अपनें उम्मीदवार भी फाइनल कर दिए हैं

लेकिन समाजवादी पार्टी में अब भी उम्मीदवारों को लेकर असमंजस की स्थिति उत्पन्न हैं. अखिलेश यादव लगातार उन लोगों के टिकट काट रहें हैं जिनका टिकट पहले फाइनल कर चुके थे।

अखिलेश यादव ने कैसरगंज विधानसभा सीट से मसूद आलम का टिकट काटकर आनंद यादव को दिया हैं जिससे मसूद आलम के समर्थकों में काफ़ी गुस्सा हैं।

मसूद आलम का कहना हैं कि “मुझ से कहा गया कि आप विधानसभा कटरा न लड़ें कैसरगंज लड़ लें मैने 6 महीने दिन रात मेहनत की गांव की गलियों की खाक छाना माहौल मेरे पक्ष मे खड़ा हो गया।

अखिलेश द्वारा गठित सर्वे टीम ने अपनी रिपोर्ट में मुझे जिताऊ प्रत्यासी बताया और इसी आधार पर मुझे 2 फरवरी को प्रत्यासी घोषित किया गया।

3 फरवरी को सिम्बल दिया और 5 फरवरी को मैने नामांकन कर सिम्बल जमा कर दिया. आज अभी हमें पता चला है कि हमारा टिकट काट दिया गया।

विदित रहे 20 वर्षों से यह सीट समाजवादी पार्टी नही जीती है और चारों बार सपा तीसरे स्थान रही. आज जब 20 वर्षों बाद समाजवादी पार्टी जीतने जा रही थी तो कुछ लोगों द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष को गुमराह कर मेरा टिकट जिताऊ उम्मीदवार का टिकट कटवा दिया।

जिससे मेरे चाहने वाले लाखों समर्थक व शुभचिंतकों को भारी दुःख हुआ है सैंकड़ों समर्थकों ने रोते हुये मुझे फोन किया है. मैं आप सबसे कहना चाहता हूँ कि धैर्य बनाएं रखे पार्टी और अपने नेता के खिलाफ कोई टिप्पड़ी न करें. मुझे उम्मीद है आप सबको इंसाफ मिलेगा आप सब शालीनतापूर्वक अपनी बात रखें

मसूद आलम ने अखिलेश यादव को संदेश देते हुए कहा हैं कि “इस मण्डल के लाखों लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए पुनर्विचार कर लें. एक जीती हुई सीट हाथ से जा रही है।”

6 फरवरी को जरवाल रोड बहराइच नामक एक फेसबुक पेज ने सर्वे किया जिसमें पूछा गया कि “कैसरगंज से आपके हिसाब से सपा से कौन होना चाहिए? आनंद यादव या मसूद आलम खान? अपने फेवरेट प्रत्याशी के लिए अपना समर्थन दिखाओ।”

इस सर्वे में न्यूज़ लिखें जानें तक मसूद आलम को 17707 वोट तथा आनंद यादव को 2509 वोट मिले हैं. जिससे साफ पता चलता हैं कि जनता का प्यार मसूद आलम के साथ हैं।

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