भारत की प्रमुख जांच एजेंसी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पूर्वोत्तर भारत में कथित “आतंकवादी गतिविधियों” और अवैध प्रवेश के आरोप में एक अमेरिकी नागरिक सहित सात विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। सभी आरोपियों को पूछताछ के लिए 11 दिनों की रिमांड पर भेजा गया है।
हिरासत में लिए गए लोगों में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। एनआईए के अनुसार, वैन डाइक को एक भाड़े का सैनिक बताया गया है।
जांच एजेंसी का कहना है कि ये सभी विदेशी नागरिक वैध वीजा पर मिजोरम पहुंचे थे, लेकिन बाद में कथित रूप से सीमा पार कर म्यांमार चले गए, जहां उन्होंने विद्रोही समूहों से संपर्क स्थापित किया।
एनआईए ने आरोप लगाया है कि यह समूह सीमा पार आतंकी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है और आतंकियों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ ड्रोन जैसे हथियारों की आपूर्ति में भी शामिल था। एजेंसी के मुताबिक, यूरोप से ड्रोन की एक बड़ी खेप भारत लाई गई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने एनआईए को 11 दिन की हिरासत दी, हालांकि एजेंसी ने 15 दिन की मांग की थी। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अतुल त्यागी पेश हुए, जबकि बचाव पक्ष ने रिमांड का विरोध किया।
इस बीच, यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनके नागरिकों को किसी भी गैरकानूनी या आतंकी गतिविधि से जोड़ने के ठोस सबूत नहीं हैं। यूक्रेन ने कुछ मीडिया रिपोर्टों को “निराधार और विकृत” बताया है।
यूक्रेन ने यह भी दावा किया कि भारत में उसके दूतावास को आरोपियों से सीधे मिलने की अनुमति नहीं दी गई और गिरफ्तारी की औपचारिक सूचना भी समय पर नहीं दी गई। इस संबंध में यूक्रेन के राजदूत ने भारत सरकार के समक्ष विरोध दर्ज कराया है और अपने नागरिकों की रिहाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, मैथ्यू वैन डाइक “संस ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल” नामक संगठन के संस्थापक हैं, जो संघर्ष क्षेत्रों में सैन्य प्रशिक्षण और सहायता प्रदान करता है। वे पहले लीबिया और यूक्रेन जैसे संघर्ष क्षेत्रों में सक्रिय रह चुके हैं।
फिलहाल, मामले की जांच जारी है और एनआईए पूरे नेटवर्क और संभावित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की गहराई से जांच कर रही है।

