मौलाना महमूद मदनी ने कहा है कि भारत में कई मुसलमान खुद को “असुरक्षित, घिरा हुआ और अपमानित” महसूस कर रहे हैं। Jamiat Ulema-e-Hind के अध्यक्ष मदानी ने इस स्थिति के लिए शासन और कानून प्रवर्तन में कथित पूर्वाग्रह को जिम्मेदार बताया।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह चिंता किसी एक घटना की वजह से नहीं, बल्कि एक “व्यापक पैटर्न” का परिणाम है। उनके अनुसार, कई मामलों में अधिकारियों की प्रतिक्रिया असंगत दिखाई देती है, जिससे लोगों का भरोसा कमजोर होता है।
मदानी ने Assam में अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर कहा कि इसे धार्मिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना वैध दस्तावेज वाले किसी भी व्यक्ति को, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, देश में रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
उन्होंने National Register of Citizens (NRC) प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि इस पर भी कई विवाद और चिंताएं सामने आई हैं।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर उन्होंने कहा कि असंतोष सिर्फ मुसलमानों तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य समुदायों में भी इसको लेकर शिकायतें हैं। इससे यह मुद्दा व्यापक बन जाता है।
UCC और धार्मिक स्वतंत्रता
Uniform Civil Code (UCC) पर मदानी ने कहा कि उनका संगठन पहले विधेयक का अध्ययन करेगा, उसके बाद ही कोई आधिकारिक रुख सामने आएगा।
साथ ही उन्होंने धार्मिक गतिविधियों पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को लेकर कहा कि यदि कोई नियम बनाया जाता है, तो उसे सभी समुदायों पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।

