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अमेरिका में Republican Party से जुड़े निर्वाचित प्रतिनिधि मुस्लिम समुदाय के खिलाफ चला रहे संगठित अभियान: CSOH रिपोर्ट

Center for the Study of Organized Hate (CSOH) ने एक नई रिपोर्ट जारी कर अमेरिकी राजनीति में मुस्लिम विरोधी अभियान को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं। “Manufacturing the Muslim Threat” शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि Republican Party से जुड़े कई निर्वाचित प्रतिनिधि सोशल मीडिया और कानून के जरिए मुस्लिम समुदाय के खिलाफ संगठित अभियान चला रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2025 से मार्च 2026 के बीच 46 रिपब्लिकन नेताओं ने कुल 1,111 सोशल मीडिया पोस्ट किए, जिनमें मुस्लिमों के खिलाफ नफरत और साजिश से जुड़ी बातें कही गईं। इसके साथ ही, कांग्रेस में “शरिया” से जुड़े 8 विधेयक पेश किए गए और “Sharia-Free America Caucus” नामक समूह तेजी से बढ़कर 62 सदस्यों तक पहुंच गया।

CSOH की प्रोग्राम लीड नियाला मोहम्मद ने कहा कि यह एक समन्वित अभियान है, जिसमें सोशल मीडिया के जरिए डर पैदा किया जाता है और फिर उसे कानून के रूप में लागू करने की कोशिश होती है। उन्होंने इसे हाल के अमेरिकी इतिहास में अभूतपूर्व बताया।

रिपोर्ट में Dangerous Speech Project के ढांचे का इस्तेमाल किया गया, जो यह आकलन करता है कि कौन-सा भाषण हिंसा को भड़का सकता है। इस विश्लेषण में पाया गया कि कई पोस्ट ऐसे थे जो मुस्लिम अमेरिकियों के खिलाफ हिंसा के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

CSOH के निदेशक राकिब हमीद नाइक ने कहा कि प्रभावशाली लोगों द्वारा इस तरह की भाषा का इस्तेमाल बेहद चिंताजनक है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस अभियान की शुरुआत ग्रेग एबॉट के एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई, जिसमें “शरिया सिटी” जैसे दावे को बढ़ावा दिया गया।

इसके बाद यह अभियान तेजी से फैलता गया और सोशल मीडिया, कानून और राजनीतिक समूहों तक पहुंच गया। मुख्य निष्कर्षों में यह भी सामने आया कि कई पोस्ट में “इस्लामीकरण”, “आक्रमण” और “कब्जा” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जो “ग्रेट रिप्लेसमेंट” जैसी साजिश सिद्धांतों से मेल खाते हैं। कुछ पोस्ट में मुस्लिमों के खिलाफ निर्वासन की मांग की गई और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल भी हुआ।

रिपोर्ट के अनुसार, कुल 89 रिपब्लिकन निर्वाचित प्रतिनिधि इस अभियान के किसी न किसी हिस्से में शामिल पाए गए—चाहे वह सोशल मीडिया पोस्ट हों, विधायी पहल हों या कॉकस की सदस्यता।

इस रिपोर्ट ने अमेरिकी समाज में बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता और इसके संभावित खतरों पर बहस को तेज कर दिया है।

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