राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी विचारधारा का “सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि” बताया है। संगठन के महासचिव दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि मोदी अपने अनोखे शासन शैली के जरिए संघ के मूल विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं।
वाशिंगटन में एक कार्यक्रम के दौरान होसबले ने कहा कि भले ही प्रधानमंत्री मोदी हमेशा आरएसएस की पारंपरिक भाषा का इस्तेमाल न करें, लेकिन उनकी नीतियां और पहल संगठन की सोच को दर्शाती हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” और “एक पेड़ लगाओ” जैसे संदेश अलग-अलग शब्दों में हो सकते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य समान है।
होसबले ने मोदी को एक “स्वयंसेवक” बताते हुए कहा कि उनके कार्य और दृष्टिकोण स्वाभाविक रूप से संघ की विचारधारा से मेल खाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह अंतर केवल अभिव्यक्ति का है, न कि इरादों का।
आरएसएस नेता ने अगले 25 वर्षों के लिए संगठन की पांच प्रमुख प्राथमिकताओं का भी जिक्र किया। इनमें सामाजिक सद्भाव बढ़ाना, औपनिवेशिक मानसिकता को खत्म करना, नागरिक कर्तव्यों को मजबूत करना, पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देना और सतत विकास को अपनाना शामिल है।
इसके अलावा, होसबले ने “आत्मनिर्भर भारत” और “पंच प्राण” जैसी सरकारी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कार्यक्रम भी संघ की विचारधारा को प्रतिबिंबित करते हैं। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री के लिए इन मूल्यों को अपनाना स्वाभाविक है क्योंकि वे स्वयं संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहुंच बढ़ा रहा है और संगठन के बारे में फैली गलत धारणाओं को दूर करने का प्रयास कर रहा है।
खासकर पश्चिमी देशों में संघ को लेकर जो भ्रम हैं, उन्हें स्पष्ट करने की जरूरत है। होसबले ने जोर देकर कहा कि आरएसएस को केवल एक धार्मिक संगठन के रूप में देखना सही नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज और संस्कृति के व्यापक विकास के लिए काम करने वाला संगठन है।

