हैदराबाद से सांसद और एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi ने मौलाना तौसीफ रज़ा मजहरी की मौत के मामले में रेल मंत्री को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच, पीड़ित परिवार को मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग की है।
ओवैसी ने इस घटना को “ट्रांजिट-आधारित हेट क्राइम” बताते हुए भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
29 अप्रैल 2026 को लिखे गए इस पत्र में ओवैसी ने कहा कि मौलाना तौसीफ रज़ा मजहरी बिहार के किशनगंज निवासी थे और गोरखपुर की एक मस्जिद में इमाम के तौर पर कार्यरत थे।
पत्र के अनुसार, 26 अप्रैल 2026 को वह बरेली स्थित उर्स-ए-ताजुश शरिया से लौट रहे थे और ट्रेन संख्या 04314 के जनरल कोच में सफर कर रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने उन्हें “चोर” बताकर यात्रियों को उकसाया और कथित तौर पर भीड़ बनाकर हमला किया।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि यह हमला सांप्रदायिक नफरत से प्रेरित था। उन्होंने कहा कि बाद में मौलाना का शव बरेली जंक्शन के पास मिला। पत्र में यह भी कहा गया कि शुरुआत में जीआरपी और स्थानीय प्रशासन ने मामले को “दुर्घटना” बताने की कोशिश की और कहा कि वह चलती ट्रेन से गिर गए होंगे।
हालांकि, पीड़ित परिवार की ओर से शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया।
सांसद ने अपने पत्र में कहा कि भारतीय रेलवे की जिम्मेदारी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन इस मामले में एक व्यक्ति की ट्रेन के अंदर कथित रूप से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और रेलवे सुरक्षा बल समय पर हस्तक्षेप नहीं कर सका।
ओवैसी ने यह भी कहा कि मौलाना तौसीफ रज़ा अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और इमामत करके परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनकी मौत के बाद उनकी पत्नी और बच्चे आर्थिक संकट में आ गए हैं। ऐसे में उन्होंने केंद्र सरकार से पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक सहायता देने और परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने की मांग की है।
पत्र के अंत में ओवैसी ने रेल मंत्रालय से मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है।

