मध्य
प्रदेश के धार स्थित Bhojshala-Kamal Maula Mosque परिसर को लेकर चल रहे विवाद में मुस्लिम पक्ष ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सोमवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Salman Khurshid ने कहा कि मस्जिद से पहले वहां मंदिर होने का कोई “प्रत्यक्ष और ठोस प्रमाण” मौजूद नहीं है।
मध्य प्रदेश के धार स्थित Bhojshala-Kamal Maula Mosque परिसर को लेकर चल रहे विवाद में मुस्लिम पक्ष ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सोमवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Salman Khurshid ने कहा कि मस्जिद से पहले वहां मंदिर होने का कोई “प्रत्यक्ष और ठोस प्रमाण” मौजूद नहीं है।
मुस्लिम पक्ष का कहना है कि हिंदू संगठनों की याचिकाएं मुख्य रूप से पूजा के अधिकार से जुड़ी हैं, न कि स्वामित्व तय करने से। सुनवाई के दौरान सलमान खुर्शीद ने अयोध्या मामले का हवाला देते हुए कहा कि वहां “रामलला विराजमान” को कानूनी पक्षकार बनाया गया था, जबकि भोजशाला मामले में ऐसा कोई पक्षकार मौजूद नहीं है।
उन्होंने एएसआई की रिपोर्ट को “पक्षपातपूर्ण” बताते हुए आरोप लगाया कि रिपोर्ट में बार-बार “भोजशाला मंदिर” शब्द का इस्तेमाल किया गया, जबकि ऐसे किसी मंदिर के अस्तित्व का निर्णायक ऐतिहासिक प्रमाण पेश नहीं किया गया।
मुस्लिम पक्ष ने कहा कि रिपोर्ट में दिए गए निष्कर्ष केवल अनुमान और ऐतिहासिक व्याख्याओं पर आधारित हैं. सुनवाई के दौरान खुदाई प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए। मुस्लिम पक्ष ने आरोप लगाया कि सर्वेक्षण की पूरी वीडियोग्राफी सभी पक्षों को उपलब्ध नहीं कराई गई और जो वीडियो दिए गए वे बहुत छोटे थे।
साथ ही यह दावा भी किया गया कि खुदाई में मिली कुछ कलाकृतियां सदियों पुरानी होने के बावजूद बेहद साफ दिखाई दे रही थीं। अदालत में पेश तस्वीरों में प्लास्टिक की बोतलों जैसी आधुनिक वस्तुओं का जिक्र करते हुए खुदाई की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए गए।
सलमान खुर्शीद ने यह भी कहा कि “सरस्वती सदन” और शिक्षा केंद्रों का उल्लेख करने वाले शिलालेख किसी मंदिर का प्रमाण नहीं माने जा सकते। उनके अनुसार यह स्थल किसी शैक्षणिक या सांस्कृतिक केंद्र से भी जुड़ा हो सकता है, क्योंकि प्राचीन समय में ज्ञान केंद्रों में देवी सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित करने की परंपरा रही है।
मुस्लिम पक्ष ने अदालत से यह भी पूछा कि निर्देशों के बावजूद कार्बन डेटिंग और अन्य वैज्ञानिक परीक्षण पूरी तरह क्यों नहीं किए गए। मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को जारी रहेगी।
उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट के आदेश पर एएसआई ने 2024 में इस विवादित परिसर का 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया था, जिसमें परमार कालीन वास्तुकला के अवशेष मिलने का दावा किया गया था।

