भारत स्थित फ़िलिस्तीन दूतावास ने एक प्रेस बयान जारी कर कहा है कि कब्ज़े वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर मानवीय संकट का सामना कर रही है। दूतावास के अनुसार, गाज़ा पट्टी में जारी युद्ध, अस्पतालों और स्वास्थ्य ढांचे की तबाही, मानवीय सहायता पर प्रतिबंध तथा वित्तीय संकट के कारण स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप हो चुकी हैं।
दूतावास ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार गाज़ा के 36 अस्पतालों में से केवल 19 ही सीमित क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। अस्पतालों में एनेस्थीसिया, एंटीबायोटिक, इंसुलिन, डायलिसिस सामग्री, रक्त, सर्जिकल उपकरण और जनरेटर चलाने के लिए ईंधन जैसी आवश्यक चिकित्सा सामग्री की भारी कमी है।
बयान में कहा गया है कि गाज़ा में हजारों लोग अब भी चिकित्सा निकासी (Medical Evacuation) का इंतजार कर रहे हैं। वहीं मलबे में दबे शव, स्वच्छ पानी की कमी, खराब स्वच्छता व्यवस्था, कचरे के ढेर और विस्थापित लोगों के भीड़भाड़ वाले शिविरों के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ गया है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले मरीजों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है।
दूतावास ने यह भी कहा कि पश्चिमी तट (वेस्ट बैंक) और पूर्वी यरुशलम में भी स्वास्थ्य सेवाएं वित्तीय संकट से जूझ रही हैं। फ़िलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 520 आवश्यक दवाओं में से लगभग 180 पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं।
कैंसर के इलाज में उपयोग होने वाली 97 दवाओं में से 50 का स्टॉक शून्य हो गया है, जिससे लगभग 4,000 कैंसर मरीजों की जान खतरे में है। वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक 11,000 से अधिक निर्धारित सर्जरी टालनी पड़ी हैं।
फ़िलिस्तीन दूतावास ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से भारत सरकार, भारतीय मानवीय संगठनों, चिकित्सा संस्थानों और नागरिक समाज से तत्काल सहायता की अपील की है। दूतावास ने कहा कि फ़िलिस्तीनी स्वास्थ्य क्षेत्र को जीवनरक्षक दवाओं और चिकित्सा सामग्री के रूप में लगभग 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर की तत्काल सहायता की आवश्यकता है।
अपने बयान के अंत में दूतावास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित “आरोग्य मैत्री” परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने मानवीय संकट से प्रभावित देशों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई है।
दूतावास ने भारत से इस प्रतिबद्धता के अनुरूप फ़िलिस्तीन की सहायता करने की अपील करते हुए कहा, “यदि भारत और भारत के लोग नहीं, तो कौन? यदि अभी नहीं, तो कब? हर जीवन मायने रखता है।”

