नई दिल्ली, 5 सितंबर 2026: गुजरात कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी और व्हिसलब्लोअर संजीव भट्ट को जेल में बंद हुए आठ साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर उनके बच्चों आकाशी भट्ट और शांतनु भट्ट ने एक भावुक बयान जारी करते हुए कहा कि उनके पिता ने अपनी अंतरात्मा और सिद्धांतों से समझौता करने के बजाय सत्ता के खिलाफ खड़े होने का रास्ता चुना, जिसकी कीमत उन्हें अपनी आजादी, करियर और परिवार से दूर रहकर चुकानी पड़ी।
दोनों ने कहा कि 5 सितंबर उनके लिए केवल 2,923 दिनों की जुदाई का दिन नहीं है, बल्कि न्याय के लिए आठ वर्षों से जारी संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पिता को चुप कराने के लिए उन पर ऐसे आरोप लगाए गए, जिन्हें वे “गढ़े हुए आरोप” मानते हैं। बच्चों के मुताबिक, आठ साल बीतने के बावजूद उनके पिता का हौसला और संकल्प कमजोर नहीं हुआ है।
आकाशी और शांतनु ने अपने बयान में कहा कि उनके पिता ने उन्हें सिखाया कि ऐसे मौके आते हैं जब व्यक्ति को तय करना पड़ता है कि चुप रहने की सुरक्षा ज्यादा महत्वपूर्ण है या अपनी अंतरात्मा की आवाज के लिए खड़ा होना। उन्होंने कहा कि संजीव भट्ट जानते थे कि सत्ता के खिलाफ खड़े होने की लड़ाई बेहद कठिन और अकेली होगी, लेकिन उन्होंने अपने सिद्धांतों से पीछे हटने से इनकार किया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं चलता, बल्कि उसकी रक्षा के लिए संस्थाओं की स्वतंत्रता, कानून का शासन और सत्ता से जवाबदेही मांगने वाले नागरिक जरूरी हैं। बच्चों ने आरोप लगाया कि जब संस्थाएं अपनी स्वतंत्र भूमिका खो देती हैं और सत्ता के अधीन हो जाती हैं, तो वही संस्थाएं आम नागरिकों के खिलाफ इस्तेमाल की जा सकती हैं।
संजीव भट्ट के बच्चों ने कहा कि उनके पिता ने अपने लिए नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए आवाज उठाई जिन्होंने नफरत और हिंसा का सामना किया। उन्होंने कहा कि भट्ट ने अपना करियर, प्रतिष्ठा, आजादी और जीवन के वर्षों को दांव पर लगाया क्योंकि उनका मानना था कि बड़ी शक्ति रखने वालों से उतनी ही बड़ी जवाबदेही की मांग की जानी चाहिए।
बयान में कहा गया कि आठ साल की कैद के बावजूद उनके पिता से वह चीज नहीं छीनी जा सकी, जिसने उन्हें सत्ता के लिए चुनौतीपूर्ण बनाया—अपनी अंतरात्मा के सामने झुकने से इनकार। बच्चों ने कहा कि उनके पिता का संघर्ष उन्हें यह याद दिलाता है कि लोकतंत्र तभी सुरक्षित रह सकता है जब आम लोग सवाल पूछने और सत्ता से जवाब मांगने का साहस बनाए रखें।
संजीव भट्ट के बच्चों ने कहा कि उनके पिता ने “सच के लिए आवाज उठाने” की कीमत अपनी स्वतंत्रता गंवाकर चुकाई है, लेकिन उनका हौसला अब भी कायम है। उन्होंने लोगों से उनके पिता को याद रखने और उन सभी लोगों के लिए आवाज उठाने की अपील की जो नागरिकों के अधिकारों, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “आठ साल बाद भी हमारे पिता मजबूती से खड़े हैं, उनका सिर ऊंचा है, उनकी अंतरात्मा सुरक्षित है और उनका संकल्प अटूट है। हमारा न्याय के लिए संघर्ष जारी रहेगा।”
संजीव भट्ट 2011 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक हलफनामा दाखिल करने के बाद चर्चा में आए थे, जिसमें उन्होंने 2002 के गुजरात दंगों के दौरान मोदी पर कथित भूमिका का आरोप लगाया था। 2011 में उन्हें सेवा से निलंबित किया गया और 2015 में बर्खास्त कर दिया गया। वे सितंबर 2018 से जेल में हैं। 1990 के हिरासत में मौत के मामले में 2019 में उन्हें दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इसके अलावा 1996 के कथित ड्रग-प्लांटिंग मामले में 2024 में उन्हें 20 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई गई। भट्ट के परिवार और उनके समर्थक इन मामलों और सजाओं को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते रहे हैं।

