नई दिल्ली, 3 अक्टूबर 2026। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने सरकार से जनहित से जुड़े मुद्दों पर टकराव के बजाय बातचीत और संस्थागत संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की है। संगठन ने मस्जिदों और अन्य इबादतगाहों को निशाना बनाए जाने, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित अनियमितताओं और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शनों पर पाबंदियों को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि लाखों मूल मतदाताओं समेत करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने की खबरों ने व्यापक चिंता पैदा की है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची प्रतिनिधि लोकतंत्र की बुनियाद है और इसमें बड़े पैमाने पर बदलाव के लिए पारदर्शिता, सावधानी और प्रभावित लोगों के लिए आसान सुधार व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से प्रक्रिया को लेकर उठी चिंताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेने और जनता का भरोसा बनाए रखने में असफल रहने की स्थिति में पद छोड़ने की अपील की।
जमाअत ने SIR प्रक्रिया को रोकने, पुनरीक्षण से प्रभावित पात्र मतदाताओं की पहचान कर उनके नाम बहाल करने और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। संगठन ने यह भी कहा कि जहां गड़बड़ी साबित हो, वहां जवाबदेही तय की जानी चाहिए। इसके साथ ही चुनाव आयोग की निष्पक्षता और तटस्थता सुनिश्चित करने के लिए उसके गठन और नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार की जरूरत बताई गई है।
प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शनों पर प्रशासनिक प्रक्रियाओं और पुलिस प्रतिबंधों के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। उन्होंने हाल के प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अनुमति न देना और उन्हें हिरासत में लेना लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के लिए उपलब्ध जगह को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने सरकार और पुलिस से शांतिपूर्ण सार्वजनिक अभिव्यक्ति के लिए पूर्व अनुमति की अनिवार्यता को खत्म करने, गैर-जरूरी हिरासत और बेबुनियाद एफआईआर पर रोक लगाने तथा पुलिस दुर्व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की।
जमाअत के दूसरे उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने मस्जिदों, चर्चों और अन्य इबादतगाहों को लगातार निशाना बनाए जाने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसी तोड़-फोड़ की घटनाओं से धार्मिक अल्पसंख्यकों में नाराज़गी, बेचैनी और निराशा बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई में निष्पक्षता, संवेदनशीलता और कानून का सख्ती से पालन होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि विवादित धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में सभी पक्षों के दावों और चिंताओं की सावधानीपूर्वक जांच की जाए और जहां संभव हो, विवादों का समाधान कानूनी समझौते, नियमितीकरण या अन्य वैध तरीकों से किया जाए।
मलिक मोतसिम खान ने कहा कि यदि किसी अंतिम न्यायिक या कानूनी फैसले के तहत इबादतगाह को गिराना अपरिहार्य हो, तो पूरी प्रक्रिया न्यायिक निगरानी में होनी चाहिए। उन्होंने ऐसे मामलों की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की, जहां तोड़-फोड़ की वैधता पर सवाल उठे हैं। जमाअत ने कहा कि जहां गैर-कानूनी तोड़-फोड़ साबित हो, वहां प्रभावित धार्मिक स्थलों की बहाली के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए।
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने सरकार से दोहराया कि जनहित और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े विवादों का समाधान टकराव के बजाय संवाद के जरिए किया जाना चाहिए। संगठन ने सरकार से नागरिकों और सामाजिक संगठनों के साथ सीधे संवाद कर उनकी जायज़ शिकायतों का लोकतांत्रिक और संस्थागत तरीके से समाधान करने की अपील की है।अगर चाहें तो मैं इसका Journo Mirror स्टाइल में थोड़ा ज्यादा प्रभावशाली और न्यूज़-पोर्टल वाला वर्जन भी बना सकता हूँ।

