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आप लोगों के साथ खेल रहे हैं’: 4 मुसलमानों की नागरिकता कार्रवाई पर कलकत्ता HC के तीखे सवाल

कोलकाता। कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के चार लोगों की नागरिकता तय करने की कार्रवाई को लेकर अधिकारियों से सवाल किए हैं। ये चारों व्यक्ति फिलहाल हिरासत में हैं और उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के खिलाफ विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अपील लंबित है। अदालत ने सवाल उठाया कि जब उनकी अपील पर न्यायाधिकरण सुनवाई कर रहा है, तो इसी दौरान उनकी नागरिकता तय करने की कार्रवाई कैसे की जा सकती है।

यह मामला न्यायमूर्ति कृष्ण राव की अदालत में मुर्शिदाबाद के समसेरगंज निवासी मुस्ताकिम शेख की याचिका पर सामने आया। याचिका में चारों लोगों की SIR अपीलों पर जल्द सुनवाई की मांग की गई है। चारों उन 23 लोगों में शामिल थे, जिन्हें 4 सितंबर को कथित तौर पर बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में हिरासत में लिया गया था। इनमें से 19 लोगों को करीब दो सप्ताह बाद रिहा कर दिया गया, जबकि चार लोग हिरासत में बने हुए हैं।

सुनवाई के दौरान अदालत ने बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक और विदेशी पंजीकरण अधिकारी से सवाल किया कि जब चारों लोगों ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ अपीलीय न्यायाधिकरण का रुख किया है, तो अधिकारी समानांतर रूप से उनकी नागरिकता कैसे तय कर सकते हैं। न्यायमूर्ति राव ने सवाल किया कि अगर अधिकारी पहले ही किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिक नहीं मानते हैं, तो फिर अपीलीय न्यायाधिकरण में लंबित अपील का क्या महत्व रह जाएगा। अदालत ने इस स्थिति को विरोधाभासी बताते हुए टिप्पणी की, “आप लोगों के साथ खेल रहे हैं।”

अदालत ने यह भी पूछा कि जब अपीलीय न्यायाधिकरण इन मामलों की सक्रिय रूप से सुनवाई कर रहा है, तब विदेशी पंजीकरण अधिकारी द्वारा नागरिकता तय किए जाने का अपील पर क्या प्रभाव पड़ेगा। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि चारों लोगों को विदेशी पंजीकरण अधिकारी ने हिरासत में लिया है। हालांकि, अधिकारी को मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को FRO को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया और हिरासत से संबंधित रिपोर्ट भी मांगी। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी।

याचिकाकर्ता के वकील के अनुसार, चारों लोगों के नाम 2002 की मतदाता सूची में दर्ज थे और उन्होंने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी मतदान किया था। याचिका दायर करने वाले मुस्ताकिम शेख ने खुद को चारों लोगों का पड़ोसी बताया है और अदालत से उनकी लंबित अपीलों पर जल्द सुनवाई कराने का अनुरोध किया है।

तृणमूल कांग्रेस सांसद समीरुल इस्लाम ने भी मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब चारों लोगों की मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील अभी लंबित है, तो उन्हें विदेशी नागरिक कैसे माना जा सकता है। उन्होंने चारों लोगों की हिरासत को आम लोगों के उत्पीड़न का मामला बताया और कहा कि वह उनके लिए लड़ाई जारी रखेंगे। हालांकि, उनकी ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।

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