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कर्नाटक: 8 मुस्लिम महिलाओं को रिकॉर्ड में ‘मृत’ दिखाने का आरोप

कर्नाटक के विजयपुरा में आठ मुस्लिम महिलाओं ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान चुनाव आयोग को दिए गए दस्तावेजों में उन्हें कथित तौर पर मृत दिखाया गया। महिलाओं का कहना है कि वे पूरी तरह जीवित हैं, इसके बावजूद उनके नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। मामले को लेकर भाजपा से निष्कासित विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल समेत अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।

बुधवार को बेंगलुरु में सामाजिक-राजनीतिक संगठन जागृत कर्नाटक की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन महिलाओं ने कथित मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों की प्रतियां सामने रखीं। महिलाओं का आरोप है कि इस तरह की कार्रवाई उनके मतदान के अधिकार को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है। उनकी ओर से चुनाव आयोग से कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करने और जमा करने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई है।

विजयपुरा में करीब 30 वर्षों से रह रहीं आंगनवाड़ी सहायिका रजिया शेख ने बताया कि उनके नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र जमा किया गया, जबकि वह जीवित हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें डर है कि इस वजह से उनका राशन कार्ड और सरकार से मिलने वाले दूसरे लाभ प्रभावित हो सकते हैं। रजिया ने बताया कि वह निरक्षर हैं और अपने परिवार का भरण-पोषण आंगनवाड़ी सहायिका के रूप में करती हैं, जबकि उनके पति दिव्यांग हैं।

जागृत कर्नाटक के संयोजक एचवी वासु ने आरोप लगाया कि यतनाल ने 31 अगस्त को चुनाव अधिकारियों को 1,054 लोगों की सूची सौंपी थी। संगठन के मुताबिक, इस सूची में शामिल आठ मामलों में मृत्यु प्रमाण पत्र लगाए गए थे और ये सभी कथित तौर पर जीवित मुस्लिम महिलाओं से जुड़े थे। संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि इतने कम समय में 198 मतदान केंद्रों पर मतदाताओं के नामों का मृत व्यक्तियों के रिकॉर्ड से मिलान कैसे किया गया और महिलाओं की मतदाता पहचान से जुड़ी तस्वीरें अधिकारियों तक कैसे पहुंचीं।

विजयपुरा के पत्रकार इरफान शेख ने अलग से दावा किया कि मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 7 के 13,000 मुद्रित आवेदन दो बैचों में नगरपालिका अधिकारियों के पास जमा किए गए थे। उनके अनुसार, बाद में चुनाव आयोग द्वारा संबंधित स्व-घोषणाओं के अनुमोदन से जुड़े दस्तावेज मांगे जाने पर उसी शाम ये आवेदन वापस ले लिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि आवेदन वापस लेना कथित अनियमितताओं को सामने आने से रोकने की कोशिश थी।

मामले में महिलाओं और सामाजिक संगठनों ने चुनाव आयोग से पूरे प्रकरण की जांच कराने और कथित तौर पर गलत मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करने या जमा करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। हालांकि, यतनाल या संबंधित चुनाव अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में सामने नहीं आई है। मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रिकॉर्ड में महिलाओं को मृत दिखाने की प्रक्रिया कैसे हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार था।

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