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असम लिंचिंग केस: 20 दोषी करार, 25 सबूतों के अभाव में बरी

असम लिंचिंग केस: 20 दोषी करार, 25 सबूतों के अभाव में बरी

असम के नगांव की एक विशेष अदालत ने 2018 के चर्चित लिंचिंग मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 20 आरोपियों को दोषी करार दिया है, जबकि 25 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया. दोषियों की सजा का ऐलान 24 अप्रैल को किया जाएगा।

यह मामला कार्बी आंगलोंग में 8 जून 2018 को हुई भीड़ हिंसा से जुड़ा है, जहां बच्चा चोरी की अफवाह के चलते दो युवकों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी।

पीड़ितों की पहचान नीलोत्पल दास और अभिजीत नाथ के रूप में हुई थी। दोनों पिकनिक से लौट रहे थे, जब भीड़ ने उनके वाहन को रोका, उन्हें बाहर घसीटा और डंडों व धारदार हथियारों से हमला कर दिया। घटना के समय इलाके में बच्चा चोरी की अफवाहों के कारण डर का माहौल था।

इस मामले में पुलिस ने कुल 45 लोगों को गिरफ्तार किया था और तीन नाबालिगों को हिरासत में लिया गया था। बाद में सभी वयस्क आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। गुवाहाटी हाई कोर्ट के निर्देश पर केस को कार्बी आंगलोंग से नगांव ट्रांसफर किया गया।

मुकदमे के दौरान 12 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिनमें से 8 गवाह बाद में अपने बयान से मुकर गए। इसके बावजूद अदालत ने मजिस्ट्रेट के सामने धारा 164 के तहत दर्ज बयानों को वैध साक्ष्य मानते हुए उन्हें नजरअंदाज करने से इनकार कर दिया।

अभियोजन पक्ष ने कड़ी सजा की मांग की है। धारा 302 के तहत दोषियों को आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक की सजा हो सकती है।

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