अरब सागर में बसे द्वीपसमूह Lakshadweep के निवासी बेहतर आपातकालीन चिकित्सा निकासी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक नीतियों, हेलीकॉप्टरों की कमी, रात्रिकालीन उड़ानों के अभाव और कमजोर स्वास्थ्य ढांचे के कारण कई मरीज समय पर इलाज नहीं पा सके, जिससे अनेक जानें चली गईं।
अमिनी द्वीप के निवासी मोहम्मद कासिम ने मकतूब मीडिया को बताया कि फरवरी 2026 में उनका चार महीने का बेटा गंभीर रूप से बीमार हो गया था। स्थानीय डॉक्टर ने तत्काल कोच्चि रेफर करने की सलाह दी, लेकिन प्रशासनिक नियमों के कारण पहले उसे कवरत्ती ले जाया गया। आवश्यक इलाज में देरी हुई और अगले दिन कोच्चि के अस्पताल में बच्चे की मृत्यु हो गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि 2021 में प्रशासक Praful Khoda Patel द्वारा लागू नई एसओपी के बाद मरीजों को सीधे मुख्य भूमि भेजने की प्रक्रिया कठिन हो गई। अब अधिकांश मामलों में पहले कवरत्ती या अगत्ती के अस्पतालों में ले जाना अनिवार्य है, जिससे गंभीर मरीजों के इलाज में देरी होती है।
द्वीपवासियों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि चिकित्सा आपात स्थितियों की तुलना में हेलीकॉप्टरों का उपयोग प्रशासनिक कार्यों और वीआईपी यात्राओं में अधिक किया जाता है। पूर्व सांसद P. P. Mohammed Faizal ने संसद में भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि मरीजों को प्राथमिकता नहीं मिल रही है।
एक और बड़ी समस्या रात्रिकालीन लैंडिंग सुविधाओं का अभाव है। शाम के बाद किसी भी गंभीर मरीज को अगले दिन तक इंतजार करना पड़ता है। 2018 में नाइट लैंडिंग परियोजना शुरू हुई थी, लेकिन आज तक पूरी नहीं हो सकी।
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, स्वास्थ्य कर्मियों के अनुबंधों में देरी और अगत्ती स्थित Rajiv Gandhi Speciality Hospital को ध्वस्त करने की योजना को लेकर लोगों में नाराजगी है। सांसद Hamdullah Sayeed ने संसद में इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है।
स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि लक्षद्वीप को एक समर्पित एयर एम्बुलेंस सेवा, आधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों से लैस हेलीकॉप्टर और अस्पतालों को चिकित्सा निकासी के फैसलों में अधिक अधिकार दिए जाने की आवश्यकता है। उनका मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में मरीजों को सीटों के बीच लिटाकर ले जाया जाता है, जो वास्तविक एयर एम्बुलेंस सेवा की परिभाषा पर खरी नहीं उतरती।
द्वीपवासियों का कहना है कि जब तक चिकित्सा निकासी को प्रशासनिक नियंत्रण से मुक्त कर डॉक्टरों के हाथों में नहीं सौंपा जाता और पर्याप्त हेलीकॉप्टर व स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं, तब तक लक्षद्वीप के लोगों की जान जोखिम में बनी रहेगी।

