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आठ साल बाद इंसाफ: UAPA केस में जमशेद ज़हूर और परवेज़ राशिद बाइज्जत बरी

राजधानी दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने एक अहम फैसले में यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) के तहत दर्ज एक पुराने मामले में दो आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया। यह फैसला करीब आठ साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आया है।

मामला साल 2018 का है, जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने लाल किला के पास से जमशेद ज़हूर पाल और परवेज़ राशिद लोन को गिरफ्तार किया था। दोनों पर आतंकवाद से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए थे और उनके खिलाफ यूएपीए व आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी के बाद दोनों लंबे समय तक जेल में ही रहे।

अदालती प्रक्रिया में देरी के चलते इस मामले में चार्ज भी काफी देर से, अप्रैल 2022 में तय किए गए। इसके बाद भी जमानत याचिकाएं खारिज होती रहीं, जिससे दोनों आरोपियों को करीब आठ साल तक हिरासत में रहना पड़ा।

हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए कोई ठोस और विश्वसनीय सबूत पेश नहीं कर सका। इसके आधार पर कोर्ट ने दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

इस केस में एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) की कानूनी टीम ने अहम भूमिका निभाई। संगठन के पदाधिकारियों ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह कानूनी जीत जरूर है, लेकिन आरोपियों ने अपने जीवन के आठ महत्वपूर्ण साल खो दिए, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला यूएपीए जैसे सख्त कानूनों के इस्तेमाल और जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करता है। साथ ही, यह न्याय प्रणाली में साक्ष्यों के महत्व और निष्पक्ष सुनवाई की जरूरत को भी रेखांकित करता है।

यह निर्णय न केवल आरोपियों के लिए राहत भरा है, बल्कि भविष्य के ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण न्यायिक उदाहरण भी माना जा रहा है।

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