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आतंकवाद के आरोप में 10 साल से जेल में बंद 3 मुस्लिम युवकों को NIA कोर्ट ने बरी किया, जमीयत उलेमा ए हिंद के वकील ने लड़ा था केस

आतंकवाद के झूठे आरोप में पिछले 10 साल से जेल में बंद 3 मुस्लिम युवकों को NIA की स्पेशल कोर्ट ने बाइज्ज़त बरी कर दिया हैं, इस मामले की पैरवी कोर्ट में जमीयत उलेमा ए हिंद के वकील ने की थीं।

मंजर इमाम, आरिज खान और अब्दुल वाहिद सिद्दीबप्पा को FIR नंबर आरसी-06/2012/एनआईए/डीएलआई में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की स्पेशल कोर्ट ने बरी करते हुए दोषमुक्त कर दिया हैं।

तीनों मुस्लिम युवकों को इंडियन मुजाहिदीन द्वारा युद्ध, आतंकवादी गतिविधियों और देश के खिलाफ साजिश रचने के आरोप में दस साल पहले गिरफ्तार किया था।

जमीयत के वकील अबूबक्र सब्बाक के साथ एडवोकेट कार्तिक मुरुकुतला ने इस मामले में मुस्लिम युवकों का केस लड़ा था।

मुस्लिम युवकों की रिहाई पर पत्रकार ज़ाकिर अली त्यागी का कहना हैं कि, आतंकवाद के आरोप में 10 साल से जेल में बंद मंज़र इमाम, आरिज़ खान, अब्दुल वाहिद को आज दिल्ली की एनआईए स्पेशल कोर्ट ने बरी कर दिया है, मंज़र इमाम पोस्ट ग्रेजुएट में गोल्डमेडेलिस्ट, आरिज़ इंग्लिश का टीचर था, 10 साल से अहमदाबाद, जयपुर ब्लास्ट के आरोप में जेल में है, इनका माज़ी कौन लौटायेगा?

इस मामले को अदालत में देख रहे एडवोकेट अबूबक्र सब्बाक मुबारक़बाद के मुस्तहिक़ है जो पिछले कई वर्षों से जमीयत उलेमा ए हिंद की तरफ़ से केस को लड़ रहे थे और आज 3 आरोपियों को लंबे समय के बाद बरी कराया, जब तक अधिकारियों की जवाबदेही तय नही होगी बेगुनाहों की ज़िंदगी तबाह होती रहेगी।

गिरफ्तारी के वक़्त गला फाड़ फाड़कर आरोपियों पर आतंकी का टैग लगाने वाले मीडिया संस्थान दैनिक भास्कर अमर उजाला, आजतक समेत किसी भी मीडिया हाउस में अभी तक इनके बरी होने की ख़बर पब्लिश नही हुई है, बेगुनाहों की ज़िंदगी को बर्बाद करने में सबसे बड़ा योगदान मीडिया हाउसेज का है।

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