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देशहित में पूजा स्थल अधिनियम 1991 को सख्ती से लागू किया जाए: मौलाना महमूद मदनी

जमीअत उलमा-ए-हिंद की कार्यकारिणी समिति की एक महत्वपूर्ण सभा जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी की अध्यक्षता में मदनी हॉल, आईटीओ, नई दिल्ली में आयोजित की गई, जिसमें वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा, पूजा स्थल अधिनियम के बावजूद मस्जिदों और मकबरों के खिलाफ संप्रदायिक शक्तियों के चल रहे अभियान, राम मंदिर समारोह, फिलिस्तीन में जारी इजरायली आतंकवाद जैसे कई ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई और महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

इससे पूर्व जमीअत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने पिछली कार्यवाही प्रस्तुत की और एडवोकेट मौलाना नियाज़ अहमद फारूकी ने पूजा स्थल अधिनियम और नई दंड संहिता के तहत मॉब लिंचिंग के लिए अलग से सजा के प्रस्ताव की पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला।

इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय भाषण में जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने कहा कि मस्जिदों और मजारों की सुरक्षा जमीअत उलमा-ए-हिंद के मुख्य उद्देश्यों में शामिल है। वर्तमान समय में जिस तरह से एक के बाद एक इबादतगाहों को विवादास्पद बनाने की कोशिश की जा रही है, इसके मद्देनजर यह अत्यंत आवश्यक है कि एक ठोस कार्य योजना बनाई जाए और समाधान के उपायों के माध्यम से इनका स्थाई हल निकाला जाए। उन्होंने कहा कि कुछ शक्तियां मुस्लिम अल्पसंख्यकों के नीचा दिखाने और उनको मानसिक प्रताड़ना और चोट पहुंचाने के लगातार कोशिशें कर रही हैं, इसमें मीडिया की भी बड़ी भूमिका है।

जमीअत उलमा-ए-हिंद ने हमेशा एसी शक्तियों से मुकाबला किया है और देश एवं राष्ट्र के पक्ष में सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने के साथ-साथ संविधान और कानून के माध्यम से न्याय प्राप्त करने की कोशिश की है। इसके अलावा, सरकारों को भी ऐसी परिस्थितियों को नियंत्रित करने के लिए बार-बार सावधान किया है। वर्तमान समय में हम उसी भूमिका पर कायम हैं और एक सकारात्मक और स्थिर सोच के साथ स्थिति का सामना कर रहे हैं। मौलाना मदनी ने विशेष रूप से राम मंदिर समारोह की पृष्ठभूमि में कुछ चिंताओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।

मौलाना मदनी ने इसके अलावा मुसलमानों की सामाजिक और सामुदायिक स्थिति पर भी गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि समाज सुधार के अभियानों को सही दिशा देने की जरूरत है। युवाओं में नशे की लत और मुसलमानों की समग्र परिस्थितियों में गिरावट के बावजूद शादी-ब्याह में फिजूलखर्ची के समाधान के लिए हमें कड़ी मेहनत करनी होगी। केवल पारंपरिक तरीका अपनाकर समाज सुधार का अभियान लाभदायक नहीं हो सकता, बल्कि विभिन्न समुदायों को जोड़कर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कार्यकारिणीप समिति के सदस्यों से राष्ट्र निर्माण के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने की अपील की।
कार्यकारिणी समिति ने अपने फैसले में राम मंदिर समारोहों की पृष्ठभूमि में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव में कहा गया कि जमीअत उलमा-ए-हिंद की यह सभा शांति भंग करने, अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने और डराने-धमकाने की कोशिशों पर चिंताओं की ओर सरकार सरकार और कानून एवं व्यवस्था प्रवर्तन एजेंसियों का ध्यान आकर्षित करना आवश्यक समझती है।

देश में जो घृणा का वातावरण बनाया जा रहा है वह किसी भी तरह से देशहित में नहीं है। इसके अलावा हम इसे चुनाव को अनुचित तरीके से प्रभावित करने का माध्यम भी मानते हैं। हम इस अवसर पर अपने इस रुख को दोहराना जरूरी समझते हैं कि बाबरी मस्जिद के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का फैसला न्याय के मानकों पर खरा नहीं उतरता। यह निर्णय न्याय की भावना के विपरीत आस्था और तकनीकी पहलुओं पर आधारित है। सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं माना है कि इस बात का कोई सबूत मौजूद नहीं है कि बाबरी मस्जिद का निर्माण मंदिर को तोड़कर किया गया था। सभा को इस बात पर भी चिंता है कि “पूजा स्थल कानून 1991 के कठोरती से क्रियान्वयन से संबंधित अपने फैसले में आश्वासन के बावजूद, अदालतें अन्य मस्जिदों पर दावों की भी सुनवाई कर रही हैं। यह रवैया न्याय व्यवस्था में देश के न्यायप्रिय लोगों का विश्वास कम करने का कारण है।
प्रस्ताव में आगे कहा गया कि राम मंदिर के समारोहों में सरकार की सक्रिय भागीदारी को एक अनुचित प्रक्रिया मानते हुए हम यह अपील करते हैं कि सरकार और उसकी संस्थाओं को पक्षपातपूर्ण नीति से बचना चाहिए।

इसके साथ ही हम मुसलमानों और देश की जनता से यह भी अपील करते हैं कि वह इन परिस्थितियों में देश में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करें।
कार्यकारिणी समिति में वक्फ संपत्तियों को लेकर जमीअत की मरकजी वक्फ कमेटी की सिफारिशें पेश की गईं। अत: इससे संबंधित विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए संगठित संघर्ष पर बल देते हुए यह निर्णया किय गया कि जमीअत उलमा-ए-हिंद कार्यालय के ‘अवकाफ विभाग’ को पुनर्जीवित किया जाए, इसके लिए मरकजी वक्फ कमेटी के संयोजक हाजी मोहम्मद हारून साहब भोपाल को नियुक्त किया गया। साथ ही समिति की सिफारिशों पर विचार करते हुए यह निर्णय लिया गया कि राष्ट्रीय 2024 में हैदराबाद में अवकाफ सम्मेलन फरवरी आयोजित किया जाए।

सभा में मॉब लिंचिंग से संबंधित बनाए गए नए कानून की समीक्षा की गई। यह पाया गया कि कानून के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत अध्ययन आवश्यक है। इसलिए इस उद्देश्य के लिए एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया, जिसके सदस्य (1) एडवोकेट एमआर शमशाद (2) एडवोकेट तैय्यब खान (3) एडवोकेट नियाज़ अहमद फारूकी हैं। यह कमेटी अगले तीस दिनों में अपनी रिपोर्ट देगी।

सभा में फ़िलिस्तीन में जारी खूनी नरसंहार और मानवीय मौतों पर गहरा दुःख और चिंता व्यक्त की गई। पारित प्रस्ताव में कहा गया कि शर्मनाक बात यह है कि इस घोर क्रूरता को रोकने में संयुक्त राष्ट्र भी विफल और अमेरिका एवं उसके सहयोगी देश इजराइल का समर्थन और सहयोग कर रहे हैं। इस भयावह स्थिति पर जमीअत उलमा-ए-हिंद विश्व समुदाय विशेष रूप से भारत सरकार से मांग करती है कि वह अपने प्रभाव का उपयोग कर इस क्रूरता को जल्द से जल्द बंद कराने और फिलिस्तीनियों को उनके अधिकार दिलाने का प्रयास करें और एक स्वतंत्र एवं संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना से संबंधित संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों को लागू कराएं।
सभा में मणिपुर में जारी हिंसा और उसके बढ़ते प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की गई और इसे सरकार और मशीनरी की विफलता बताया गया।
सभा में एक दल या पदाधिकारी के रूप में चुनाव में किसी राजनीतिक दल के समर्थन और प्रचार को लेकर जमीअत के रुख पर चर्चा हुई।

इस संबंध में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि जमीअत उलमा-ए-हिंद के पिछले निर्णय और लंबे समय से चली आ रहे रुख के अनुसार, जमीअत के पदाधिकारी चुनावों में धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों का समर्थन व्यक्तिगत रूप से कर सकते हैं, लेकिन जमीअत उलमा-ए-हिंद के तौर पर चुनावों में किसी विशेष राजनीतिक दल का समर्थन नहीं किया जा सकता।

हाल के दिनों में ऐसी शिकायतें आई हैं कि जमीअत उलमा-ए-हिंद की कुछ इकाइयों और पदाधिकारियों ने औपचारिक रूप से जमीअत उलमा-ए-हिंद की ओर से किसी विशेष पार्टी के लिए अपना समर्थन की घोषणा की और चुनाव अभियान में सक्रिय रूप से भाग लिया। उनकी इस तरह की हरकत को जमीअत के नियमों का उल्लंघन घोषित करते हुए, कार्यकारिणी समिति की यह सभा अपने पिछले प्रस्ताव को दोहराती है और इसको सख्ती से मानने और उल्लंघन करने वालों को चेतावनी देने और भविष्य में उल्लंघन के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश देती है। कार्यकारिणी में समाज सुधार के लिए कार्ययोजना तैयार करने, कुरान पढ़ाने के लिए पाठ्यक्रम तैयार करने, काम करने का तरीका और दिशानिर्देशों को संकलित करने और जमीअत बिल्डिंग गली बल्लीमारान आदि के लिए अलग-अलग समितियां भी बनाई गईं जो निर्धारित अवधि के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी। इसके साथ ही यह निर्णय लिया गया कि मई 2024 के महीने में केंद्रीय प्रबंधन समिति की बैठक दिल्ली में आयोजित की जाए। सभा देर रात शूरा दारुल उलूम देवबंद के सदस्य मौलाना रहमतुल्ला मीर कश्मीरी की दुआ के साथ समाप्त हुई।

सभा में जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी और महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी के अलावा मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी मोहतमिम दारुल उलूम देवबंद, मौलाना रहमतुल्लाह मीर कश्मीरी, मौलाना मोहम्मद सलमान बिजनोरी जमीअत उलमा-ए-हिंद के उपाध्यक्ष, मौलाना कारी शौकत अली शामिल जमीअत उलमा-ए-हिंद के कोषाध्यक्ष, नायब अमीरुलहिंद मौलाना मुफ्ती मोहम्मद सलमान मंसूरपुरी, मौलाना मुफ्ती मोहम्मद राशिद आजमी नायब मोहतमिम दारुल उलूम देवबंद, मौलाना अब्दुल्ला मारूफी दारुल उलूम देवबंद, हाजी मोहम्मद हारून मध्य प्रदेश, मौलाना मोहम्मद आकिल गढ़ी दौलत, मौलाना मुफ्ती मोहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी, मुफ्ती मोहम्मद जावेद इकबाल किशनगंज, मौलाना नियाज अहमद फारूकी एडवोकेट, मौलाना कलीमुल्लाह खान कासमी, मौलाना मोहम्मद नाजिम पटना, मौलाना मोहम्मद इब्राहीम केरल, मौलाना अब्दुल कुद्दूस पालनपुरी, हाफिज ओबैदुल्ला बनारस, मुफ्ती अब्दुर्रहमान कासमी नौगावां सादात, मौलाना यह्या करीमी मेवात, मुफ्ती अब्दुल कादिर असम, मौलाना हबीबुर्रहमान इलाहाबाद ने भाग लिया।

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