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राजस्थान: अशोक गहलोत ने किया मदरसा पैराटीचर्स के साथ धोखा, चुनाव में परमानेंट करने का वादा किया था लेकिन 3 साल बाद भी पूरा नहीं किया

13,500 के लगभग पैराटीचर्स राजस्थान में कार्यरत हैं जिनको परमानेंट करना है

राजस्थान की कांग्रेस सरकार के खिलाफ पिछले 11 दिन से मदरसा पैराटीचर्स, राजीव गांधी पाठशाला पैराटीचर्स और शिक्षक धरना प्रदर्शन कर रहें हैं।

प्रदर्शन कर रहें शिक्षकों का कहना है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हमारे साथ धोखा किया हैं, उन्होंने अपने चुनावी घोषणापत्र में सभी संविदा शिक्षक (यानी जो ठेके पर हैं) को परमानेंट करने का वादा किया था।

लेकिन आज उनको मुख्यमंत्री बने हुए तीन साल हो चुके हैं और अशोक गहलोत अपना वादा पूरा नहीं कर रहें हैं।

पैराटीचर्स आदिवासी और पिछड़े इलाके के बच्चों को शिक्षित करने के लिए पुरजोर मेहनत करते हैं, ताकि वह भी देश की तरक्की में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।

मदरसा पैराटीचर्स शाकिर अली का कहना है कि “मदरसा पैराटीचर और पैराटीचर शिक्षाकर्मी संयुक्त संघर्ष समिति का धरना अब आर-पार में बदल गया है. 1 नवंबर से महापड़ाव का ऐलान हो गया हैं. अगर समय रहते सरकार चेतती है तो ठीक है नहीं तो उग्र आंदोलन जयपुर की सड़कों को जाम और दिल्ली कूच करके किया जाएगा।

इस आंदोलन के लीडर शमशेर भालू खान ने कहा हैं कि “अगर सरकार हमारी मांगे नहीं मानती हैं तो मैं अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दूंगा.”

शमशेर भालू खान का कहना है कि “कांग्रेस सरकार ने चुनावी घोषणापत्र में मदरसा पैराटीचर्स, राजीव गांधी पैराटीचर्स और शिक्षाकर्मियों को नियमित की घोषणा की थी. अब सरकार चुनावी घोषणा के वादे को पूरा करे ताकि शिक्षककर्मियों को राहत मिले।”

सोशल एक्टिविस्ट हंसराज मीणा के अनुसार “राजस्थान में संविदा शिक्षकों के रूप में मदरसों और सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में लगभग 13,500 पैरा शिक्षक कार्यरत है. ये संविदाकर्मी पिछले तीस साल से नियमितीकरण की माँग को लेकर आंदोलनरत है। राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार होश में आओ. मदरसा पैराटीचर्स शिक्षाकर्मीयों को नियमित करो।

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