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जंतर-मंतर पर धरने की अनुमति रद्द करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

नई दिल्ली, 17 सितंबर 2026। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित धरने की अनुमति दिल्ली पुलिस द्वारा कार्यक्रम से एक दिन पहले रद्द किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। बोर्ड ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नागरिकों के मौलिक संवैधानिक अधिकार हैं और प्रशासनिक फैसलों के जरिए इन पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए।

बोर्ड के प्रवक्ता और ‘संविधान बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के संयोजक डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने बताया कि उन्होंने पिछले दस दिनों में तीन बार संसद मार्ग थाने का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने एसएचओ और डीसीपी को आश्वस्त किया था कि धरने में शामिल होने वाले लोगों की संख्या निर्धारित सीमा के भीतर रखी जाएगी। इसके बावजूद कार्यक्रम से एक दिन पहले दिल्ली पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की आशंका का हवाला देते हुए अनुमति वापस ले ली।

AIMPLB ने इस फैसले को एकतरफा और अनुचित बताया। बोर्ड का कहना है कि इससे पहले भी जंतर-मंतर पर उसके कई शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित हो चुके हैं और उन कार्यक्रमों में पुलिस द्वारा निर्धारित सभी नियमों और शर्तों का पालन किया गया था।

बोर्ड के मुताबिक जंतर-मंतर का प्रस्तावित धरना देशव्यापी ‘संविधान बचाओ, देश बचाओ’ अभियान का पहला चरण था। इस अभियान के जरिए वंचित और कमजोर वर्गों तथा अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन, मॉब लिंचिंग, जान-माल और सम्मान पर हमलों, मस्जिदों, मदरसों और मुस्लिम बस्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई, धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्वतंत्रता पर पाबंदियों, मुस्लिम पर्सनल लॉ की सुरक्षा, समान नागरिक संहिता लागू करने के प्रयास और वंदे मातरम् को अनिवार्य किए जाने जैसे मुद्दों को उठाया जाना है।

बोर्ड ने केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से भाजपा शासित राज्यों में 2029 तक समान नागरिक संहिता लागू किए जाने संबंधी बयान का भी जिक्र किया। AIMPLB के अनुसार इससे देश की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता तथा नागरिकों के मौलिक अधिकारों को लेकर नई चिंताएं पैदा हुई हैं। बोर्ड का कहना है कि भारत विभिन्न धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों वाला देश है और संविधान इस विविधता की रक्षा करता है। मुस्लिम पर्सनल लॉ को बोर्ड मुस्लिम समुदाय के धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा मानता है।

वंदे मातरम् के सभी पदों को अनिवार्य किए जाने की कोशिशों पर भी बोर्ड ने सवाल उठाए। बोर्ड ने कहा कि देशभक्ति व्यक्त करने के माध्यम के रूप में किसी विशेष गीत के पूरे संस्करण को अनिवार्य करना धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।

बोर्ड ने देश की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। बोर्ड का आरोप है कि ऐसे समय में इन बुनियादी समस्याओं से जनता का ध्यान धार्मिक और साम्प्रदायिक मुद्दों की ओर मोड़ना राष्ट्रीय हित में नहीं है।

AIMPLB ने कहा कि ‘संविधान बचाओ, देश बचाओ’ अभियान का उद्देश्य नागरिकों को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा करना तथा देश में न्याय, स्वतंत्रता, समानता, मानवीय गरिमा और बंधुत्व के माहौल को मजबूत करना है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर पर धरने की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद देशव्यापी अभियान तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल प्रमुख वक्ताओं में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना उबैदुल्लाह खान आजमी, उपाध्यक्ष और जमात-ए-इस्लामी हिंद के अमीर सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी, उपाध्यक्ष और जमीयत अहले हदीस के अमीर मौलाना असगर अली इमाम मेहदी सलाफी, महासचिव मौलाना मोहम्मद फजलुर रहीम मुजद्दिदी, सचिव मौलाना मुहम्मद उमरैन महफूज रहमानी, जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी और बोर्ड के प्रवक्ता एवं अभियान के संयोजक डॉ. एस. क्यू. आर. इलियास शामिल रहे।

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