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बकरा ईद के दौरान मुसलमानों के खिलाफ हिंसा और नफ़रत में बढ़ोतरी, APCR की रिपोर्ट में 46 घटनाओं का ज़िक्र

नागरिक अधिकार संगठन Association for Protection of Civil Rights (APCR) ने एक नई रिपोर्ट जारी कर दावा किया है कि बकरा ईद (ईद-उल-अज़हा) से पहले और उसके दौरान देशभर में मुसलमानों को निशाना बनाकर हिंसा, धमकी, नफरत भरे भाषण और उत्पीड़न की घटनाओं में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई।

रिपोर्ट के अनुसार 11 मई से 29 मई 2026 के बीच कुल 46 हेट क्राइम की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से 30 घटनाएं सीधे तौर पर बकरा ईद से जुड़ी थीं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 25 से 29 मई के बीच मात्र पांच दिनों में 22 घटनाएं सामने आईं। APCR के अनुसार इन घटनाओं में धमकी और उत्पीड़न के 32 मामले, नफरत भरे भाषण के 6 मामले, शारीरिक हमले के 3 मामले, संपत्ति पर हमले के 3 मामले और मौत से जुड़ी 2 घटनाएं शामिल हैं।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस अवधि में तीन मुस्लिम व्यक्तियों की मौत हुई। इनमें गुजरात में कथित पुलिस हिरासत में यातना के बाद एक व्यक्ति की मौत तथा असम में मवेशी चोरी के आरोप में दो मुस्लिम युवकों की भीड़ द्वारा हत्या का मामला शामिल है।

APCR का कहना है कि कई राज्यों में बकरा ईद को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का मुद्दा बनाया गया। रिपोर्ट में ईद की नमाज़ पर प्रतिबंध, पशु कुर्बानी के विरोध, मवेशियों के परिवहन को लेकर निगरानी, मुस्लिम बस्तियों पर नजर रखने और धार्मिक गतिविधियों में व्यवधान डालने जैसी घटनाओं का उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में कथित गौ-रक्षा समूहों की गतिविधियों ने हिंसा को बढ़ावा दिया। इनमें मारपीट, सार्वजनिक अपमान, वाहनों में तोड़फोड़ और मवेशियों के परिवहन या वध के आरोपों के आधार पर हमले शामिल हैं।

APCR ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में राजनीतिक संगठनों और समूहों ने ईद से संबंधित धार्मिक गतिविधियों के खिलाफ अभियान चलाए। रिपोर्ट में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, तेलंगाना, असम और दिल्ली सहित कई राज्यों का उल्लेख किया गया है।

संगठन ने केंद्र और राज्य सरकारों से संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, नफरत आधारित अपराधों पर सख्त कार्रवाई और सभी नागरिकों को बिना भय एवं भेदभाव के अपने धार्मिक अनुष्ठान करने की गारंटी देने की मांग की है।

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