न्यू होराइजन स्कूल में जश्न-ए-सीरतुन्नबी का आयोजन, विद्यार्थियों ने दी शानदार प्रस्तुतियां
हजरत निजामुद्दीन में हुमायूं के मकबरे के उत्तर स्थित न्यू होराइजन स्कूल में मंगलवार को पैगंबर हजरत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के जीवन, उनके आदर्शों और शिक्षाओं पर आधारित जश्न-ए-सीरतुन्नबी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से पैगंबर के जीवन और उनके संदेश को सामने रखा।
कार्यक्रम में स्कूल के चेयरमैन कमाल फारूकी, मैनेजर मोहम्मद नकी और प्रिंसिपल सुमेरा खान मौजूद रहीं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी रहे। स्कूल के शिक्षकों, विद्यार्थियों और अन्य सदस्यों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत कुरआन की तिलावत से हुई। इसके बाद विद्यार्थियों ने हम्द, हदीस और नात की प्रस्तुतियां दीं। छात्रों ने पैगंबर हजरत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के जीवन, उनके व्यवहार और उनकी शिक्षाओं पर आधारित प्रस्तुतियां भी पेश कीं। विद्यार्थियों ने सच्चाई, ईमानदारी, दया, न्याय, भाईचारे और जरूरतमंदों की मदद जैसे मानवीय मूल्यों को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से सामने रखा।
मिडिल कक्षाओं के विद्यार्थियों ने सीरतुन्नबी पर अरबी संवाद प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने अरबी भाषा में पैगंबर के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सरल तरीके से प्रस्तुत किया। इसके अलावा सामूहिक नात भी पेश की गई, जिसे कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने सराहा।
कार्यक्रम में स्कूल प्रबंधन की ओर से मुख्य अतिथि सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी का परिचय कराया गया। अपने संबोधन में सांसद नदवी ने विद्यार्थियों को पैगंबर हजरत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के जीवन से सीख लेने और उनके बताए अच्छे मूल्यों को अपने व्यवहार में शामिल करने की बात कही। उन्होंने शिक्षा के साथ अच्छे चरित्र, अनुशासन, सच्चाई और समाज के प्रति जिम्मेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम में धर्मनिरपेक्षता, आपसी सम्मान और भाईचारे के संदेश को भी महत्व दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि भारत जैसे विविधता वाले देश में अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोगों के बीच सम्मान, शांति और आपसी सहयोग की भावना मजबूत करना जरूरी है। विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि अपने धर्म और संस्कृति को समझने के साथ-साथ दूसरे धर्मों और उनकी मान्यताओं का सम्मान करना भी एक जिम्मेदार नागरिक की पहचान है।
स्कूल प्रबंधन के अनुसार, ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल धार्मिक जानकारी देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में अच्छे व्यवहार, इंसानियत, सहिष्णुता और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को विकसित करना भी है। कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि अच्छे चरित्र और जिम्मेदार नागरिकता का निर्माण भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। अलग-अलग कक्षाओं के छात्रों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए सीरतुन्नबी के विभिन्न पहलुओं को सामने रखा। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को कार्यक्रम की तैयारी में मार्गदर्शन दिया और उन्हें मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला।
स्कूल की प्रिंसिपल सुमेरा खान ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों को अपने मूल्यों और इतिहास को समझने के साथ-साथ समाज में प्रेम, सम्मान और भाईचारे की भावना के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
कार्यक्रम के अंत में दुआ की गई और स्कूल प्रबंधन की ओर से मुख्य अतिथि, शिक्षकों, विद्यार्थियों और कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की प्रस्तुतियां और सीरतुन्नबी से जुड़े संदेश मुख्य आकर्षण रहे।

