नई दिल्ली: अमेरिकी खोजी समाचार संस्था प्रोपब्लिका की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने टेक्सास स्थित रिफाइनरी स्टार्टअप ‘अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग’ में कम से कम 100 मिलियन डॉलर का निवेश किया। रिपोर्ट के अनुसार, इस कंपनी से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर जुड़े हुए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह निवेश ऐसे समय में किया गया, जब ट्रंप प्रशासन भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर दबाव बना रहा था और भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए गए थे।
जांच के अनुसार, अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग की परियोजना लंबे समय से फंडिंग संकट और कानूनी विवादों के कारण ठप पड़ी हुई थी, लेकिन ट्रंप जूनियर की हिस्सेदारी और बाद में रिलायंस के निवेश के बाद परियोजना को नई गति मिली।
प्रोपब्लिका का दावा है कि कंपनी ने संभावित विदेशी निवेशकों के सामने ट्रंप परिवार से अपने संबंधों को एक बड़े आकर्षण के रूप में पेश किया। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ बैठकों में यह संकेत भी दिया गया कि कंपनी में निवेश करने से व्हाइट हाउस तक पहुंच आसान हो सकती है। हालांकि इन दावों पर कंपनी ने आपत्ति जताई है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि नवंबर 2025 में डोनाल्ड ट्रंप जूनियर ने भारत का दौरा किया था और अंबानी परिवार से मुलाकात की थी। इसके कुछ महीनों बाद रिलायंस का निवेश सामने आया।
मार्च 2026 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से इस निवेश का स्वागत करते हुए इसे अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण निवेश बताया था।
वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज ने किसी भी तरह के विशेष राजनीतिक लाभ से इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि निवेश पूरी तरह व्यावसायिक आधार पर किया गया और इसका उद्देश्य दीर्घकालिक कारोबारी लाभ हासिल करना है।
ट्रंप जूनियर के प्रवक्ता ने भी कहा कि उनकी भूमिका केवल एक निष्क्रिय निवेशक की है और उनका सरकारी निर्णयों से कोई संबंध नहीं है।
ऊर्जा क्षेत्र के कई विशेषज्ञ इस परियोजना की व्यवहारिकता पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अमेरिका में नई रिफाइनरी बनाना बेहद महंगा और जोखिम भरा काम है तथा अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह परियोजना भविष्य में वास्तव में पूरी हो पाएगी या नहीं।
फिलहाल इस मामले ने अमेरिका और भारत दोनों में राजनीतिक तथा कारोबारी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। हालांकि जांच रिपोर्ट में किसी अवैध लेनदेन का प्रत्यक्ष प्रमाण पेश नहीं किया गया है और सभी संबंधित पक्षों ने अपने ऊपर लगे संकेतों और आरोपों को खारिज किया है।

