Journo Mirror
India

नोएडा में मुस्लिम बुजुर्ग के साथ हेट क्राइम से जुड़े मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट अपनी निगरानी में जारी रखेगा

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2021 में नोएडा में बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति काज़ीम अहमद शेरवानी के साथ कथित घृणा अपराध (हेट क्राइम) के मामले की जांच पर अपनी निगरानी जारी रखने का फैसला किया है।

अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह चार सप्ताह के भीतर आरोपपत्र (चार्जशीट) के लिए आवश्यक मंजूरी की प्रक्रिया पूरी करे। अदालत ने कहा कि जांच में अब कुछ प्रगति दिखाई दे रही है, इसलिए मामले की निगरानी फिलहाल जारी रहेगी।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने बताया कि जांच एजेंसी आरोपपत्र को मंजूरी के लिए सक्षम प्राधिकारी के पास भेज चुकी है।

इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि “कम से कम अब कुछ प्रगति तो हुई है” और याचिका का निस्तारण करने के बजाय मामले की न्यायिक निगरानी जारी रखने का निर्णय लिया। अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि घटना को लगभग पांच वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच अब भी लंबित है।

साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के घृणा अपराधों से जुड़े दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए पीड़ित के लिए मुआवजे की मांग भी की गई।

यह मामला जुलाई 2021 की उस घटना से जुड़ा है, जिसमें दिल्ली निवासी काज़ीम अहमद शेरवानी ने आरोप लगाया था कि अलीगढ़ जाते समय नोएडा में कुछ लोगों ने उन्हें लिफ्ट देने के बहाने वाहन में बैठाया, उनके साथ गाली-गलौज की, उनकी दाढ़ी खींची और उनकी धार्मिक पहचान को निशाना बनाया। मामले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले भी उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर असंतोष जता चुका है।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153बी और 295ए जैसी धाराएं जोड़ने का निर्देश दिया था। बाद में अदालत ने जांच अधिकारी से यह भी सवाल किया था कि अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद धारा 153बी क्यों हटाई गई।

अदालत ने जांच अधिकारी के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया था।

Related posts

Leave a Comment