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मणिपुर: क्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति का विरोध, मुस्लिम समुदाय ने निकाला मार्च

थौबल, 23 अगस्त 2026: मणिपुर के थौबल जिले में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने राज्य वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति के विरोध में प्रदर्शन किया। 21 अगस्त को हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पंगल समुदाय के लोगों ने हिस्सा लिया और सरकार से नियुक्तियों की समीक्षा करने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने भाजपा नेतृत्व वाली राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगाए। इसके बाद उसोइपोकपी से लिलोंग बाजार तक करीब चार किलोमीटर का मार्च निकाला गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वक्फ बोर्ड की नई संरचना को लेकर मुस्लिम समुदाय में गंभीर असंतोष और चिंता है।

मणिपुर सरकार ने 3 अगस्त को राज्य के आठवें वक्फ बोर्ड में सात सदस्यों की नियुक्ति की थी। इनमें भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद ए. शारदा देवी भी शामिल हैं।

पंगल समुदाय के सदस्यों ने गैर-मुस्लिम सदस्यों को वक्फ बोर्ड में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे मुस्लिम समुदाय के धार्मिक मामलों के प्रबंधन में उसकी भूमिका और धार्मिक पहचान को लेकर चिंताएं पैदा हुई हैं।

एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि गैर-मुस्लिम सदस्यों को वक्फ बोर्ड में शामिल किए जाने से पंगल समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि समुदाय लंबे समय से अपने धार्मिक मामलों के प्रबंधन में अपनी भूमिका को महत्वपूर्ण मानता रहा है।

बताया गया है कि ये नियुक्तियां वक्फ संशोधन अधिनियम के प्रावधानों के तहत की गई हैं। कानून में वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम और महिला सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान किया गया है। इसी बदलाव को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में वक्फ बोर्डों की संरचना और प्रबंधन को लेकर बहस जारी है।

विरोध के बीच मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने पंगल समुदाय के नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री के मुताबिक, बैठक में वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वाई. अंताज़ खान भी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि समुदाय की ओर से उठाई गई चिंताओं की प्राथमिकता के आधार पर जांच की जाएगी। मणिपुर की वक्फ संपत्तियों के संरक्षण के लिए समन्वय समिति (CCPWPM) ने मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक का स्वागत किया और कहा कि सरकार पंगल समुदाय की चिंताओं से अवगत है।

यह मामला वक्फ संशोधन अधिनियम के बाद वक्फ बोर्डों की संरचना, धार्मिक प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर चल रही देशव्यापी बहस के बीच सामने आया है।

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