नई दिल्ली। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के खिलाफ सितंबर 2022 में हुई देशव्यापी कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार किए गए कई वरिष्ठ मुस्लिम नेताओं ने 22 सितंबर 2026 को जेल में चार साल पूरे कर लिए। इनमें पीएफआई के पूर्व अध्यक्ष और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के संस्थापक अध्यक्ष ई. अबूबकर, राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन परिसंघ (एनसीएचआरओ) के महासचिव प्रोफेसर पी. कोया, पीएफआई के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ओएमए सलाम और पूर्व उपाध्यक्ष ईएम अब्दुल रहमान शामिल हैं।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 22 सितंबर 2022 को पीएफआई के खिलाफ अपनी पहली देशव्यापी कार्रवाई में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत कई लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके छह दिन बाद, 27 सितंबर 2022 को केंद्र सरकार ने पीएफआई और उससे जुड़े संगठनों को गैरकानूनी घोषित करते हुए पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था।
मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी और 153ए तथा यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। जुलाई 2026 में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट स्थित विशेष एनआईए अदालत ने प्रतिबंधित पीएफआई और उसके 20 पदाधिकारियों के खिलाफ आरोप तय किए। अदालत के मुताबिक मुकदमे को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद थी। आरोपियों ने आरोपों से इनकार करते हुए मुकदमे का सामना करने की बात कही है।
चार साल जेल में रहने के बाद अब ई. अबूबकर की खराब होती सेहत को लेकर उनकी रिहाई की मांग भी तेज हुई है। बारामूला से निर्दलीय सांसद इंजीनियर राशिद ने अगस्त 2026 में साथी सांसदों को पत्र लिखकर 75 वर्षीय अबूबकर की बिना शर्त रिहाई की मांग की थी। पत्र में अबूबकर की कई स्वास्थ्य समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा गया कि वह ठीक से खाना-पीना, बोलना, सुनना और लिखना भी नहीं कर पा रहे हैं।
ई. अबूबकर के बेटे अमल थासीन ने चार साल पूरे होने पर सोशल मीडिया पोस्ट में परिवार के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि इन वर्षों में परिवार ने अदालतों के चक्कर, दुआओं और अपने प्रियजन की गैरमौजूदगी में बीते पारिवारिक पलों का सामना किया है। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार अपने प्रियजनों की वापसी की उम्मीद बनाए हुए है और कानूनी प्रक्रिया में विश्वास रखता है।
मामले में कुछ स्थानीय और राज्य स्तर के आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, जबकि कई अन्य आरोपी अब भी जेल में हैं। इस बीच, अबूबकर की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए उनकी रिहाई की मांग लगातार उठ रही है।

