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अभिनेता इमरान खान ने ‘भारत छोड़ो’ नोटिस को बॉम्बे हाईकोर्ट में दी चुनौती, निर्वासन पर रोक लगाने की मांग

अमेरिकी नागरिक और ओसीआई कार्डधारक अभिनेता इमरान खान ने विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) की ओर से जारी ‘भारत छोड़ो’ नोटिस को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी है। इस नोटिस में उन्हें 28 अक्टूबर 2026 तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया है। इमरान खान ने 17 अक्टूबर को याचिका दायर कर नोटिस को अवैध बताते हुए इसे रद्द करने और इसके क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की है।

इमरान खान ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने उन पर लगाए गए कथित कानूनी उल्लंघनों का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया। उन्हें न तो आरोपों के संबंध में पर्याप्त जानकारी दी गई और न ही अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिला। उन्होंने नोटिस को मनमाना, कठोर और कानून के विरुद्ध बताते हुए अदालत से इसे रद्द करने की अपील की है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एफआरआरओ ने यह नोटिस 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद जारी किया था। इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी। इमरान खान भी प्रदर्शन में शामिल हुए थे, जिसके दौरान मुंबई पुलिस ने उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था। बाद में उन्हें उसी दिन रिहा कर दिया गया था।

बताया गया है कि भाजपा नेता किरीट सोमैया की ओर से पुलिस से शिकायत किए जाने के बाद यह मामला एफआरआरओ तक पहुंचा। नोटिस में इमरान खान पर आव्रजन और विदेशी अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया और निर्धारित समयसीमा के भीतर भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया। नोटिस में आदेश का पालन नहीं करने पर अभियोजन की कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

इमरान खान ने अपनी याचिका में दावा किया है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग लेना अपने आप में ओसीआई कार्डधारक के लिए प्रतिबंधित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने मामले की स्वतंत्र जांच करने के बजाय राजनीतिक हस्तियों के दबाव और सोशल मीडिया अभियानों के बाद कार्रवाई की। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारत में मौजूद प्रत्येक व्यक्ति को कानून के समान संरक्षण और जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि इमरान खान के पास वर्ष 2006 से ओसीआई कार्ड है और वह चार दशकों से अधिक समय से भारत में रह रहे हैं। उन्होंने नागरिकता अधिनियम की धारा 7डी का हवाला देते हुए कहा कि ओसीआई पंजीकरण से जुड़े मामलों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने अदालत से निर्वासन, लुकआउट नोटिस जारी करने या उनके ओसीआई दर्जे के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने का अनुरोध किया है।

मामले को बॉम्बे हाई कोर्ट की खंडपीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए पेश किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक अदालत की सुनवाई और उसके आदेश से संबंधित कोई जानकारी सामने नहीं आई थी।

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