पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के रहने वाले बाबर अली, जिन्हें दुनिया का “सबसे युवा हेडमास्टर” कहा जाता है, अब राजनीति के मैदान में उतर चुके हैं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के टिकट पर जलंगी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
मार्च में अपने जन्मदिन से पहले उन्होंने यह बड़ा निर्णय लिया। बाबर अली बताते हैं कि यह फैसला आसान नहीं था—परिवार और करीबियों की राय बंटी हुई थी। कुछ लोगों ने सार्वजनिक आलोचना और दबाव का हवाला देकर मना किया, जबकि अन्य ने राजनीति के जरिए समाज सेवा का बड़ा मौका बताया।
बाबर अली की कहानी काफी प्रेरणादायक रही है। साल 2002 में, जब वे सिर्फ 9 साल के थे, उन्होंने अपने मोहल्ले के गरीब बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। यह पहल बाद में एक खुले स्कूल के रूप में विकसित हुई, जिसका नाम आनंद शिक्षा निकेतन रखा गया।
महज 16 साल की उम्र में वे सैकड़ों छात्रों के स्कूल के हेडमास्टर बन गए और BBC ने उन्हें “दुनिया का सबसे युवा हेडमास्टर” बताया।
बाबर अली ने राजनीति में आने का श्रेय ममता बनर्जी को दिया। उनका कहना है कि राज्य ही नहीं, देश के स्तर पर भी वे एक मजबूत विकल्प हैं।
उन्होंने खास तौर पर “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)” मुद्दे को उठाया और आरोप लगाया कि इससे लोगों में डर का माहौल बन रहा है और वोटिंग अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
बाबर अली को Forbes की “30 अंडर 30” सूची में भी शामिल किया जा चुका है। उनकी कहानी किताबों में पढ़ाई जाती है और वे TEDx व ‘सत्यमेव जयते’ जैसे मंचों पर भी अपनी बात रख चुके हैं।

